यह सुनवाई पूर्व भू-राजस्व मंत्री दुलाल भुइयाँ की पत्नी और होटल की मालकिन अंजना भुइयाँ द्वारा दायर रिट याचिका (W.P. (C) 4309/2024) पर हुई। अदालत ने 18 नवंबर को पुलिस अधिकारियों को कोर्ट में उपस्थित होने का आदेश दिया था।
सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस की जांच प्रक्रिया पर कड़ी नाराज़गी जताई और कहा कि जिम्मेदार अधिकारियों ने अपनी ड्यूटी का सही पालन नहीं किया। अदालत ने टिप्पणी की कि पुलिस ने अनुसंधान में पेशेवर परिपक्वता नहीं दिखाई और समाज के सामने कानून की गलत तस्वीर पेश कर दी, जिससे आम जनता के बीच पुलिस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
अदालत ने कहा कि अगर होटल की लाइसेंसिंग की जांच करनी थी, तो इसे जारी करने वाले विभाग से सत्यापन किया जा सकता था। लेकिन पुलिस ने सिर्फ एक सूचना पर कार्रवाई करते हुए होटल में छापेमारी की और उसे सील कर दिया। कोर्ट ने कहा कि किसी भी आम नागरिक से अचानक दस्तावेज मांगकर तुरंत उपलब्ध न होने पर उसे अपराधी मान लेना भारतीय दंड संहिता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि होटल के केवल तीन कमरों को सील करना तर्कसंगत नहीं था—यदि होटल अवैध था, तो पूरे परिसर को सील किया जाना चाहिए था। वहीं, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जैद इमाम ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए कहा कि छापेमारी के 40 दिन बाद FIR दर्ज हुई, जो न्यायिक प्रक्रिया के पूरी तरह विपरीत है और इससे याचिकाकर्ता की प्रतिष्ठा को ठेस पहुँची।
सभी पहलुओं पर विचार करते हुए अदालत ने 48 घंटे के भीतर होटल के सील किए गए कमरों को खोलने का आदेश दिया और कहा कि इसके बाद इस मामले की आगे सुनवाई की जाएगी।