J&K News: जम्मू कश्मीर के नौगाम थाना परिसर में शुक्रवार की रात बड़ा विस्फोट हुआ. धमाका होते ही परिसर में अफरा तफरी मच गई और देखते ही देखते कई शव बिखर गए. इस हादसे में अब तक 12 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है और दो दर्जन से अधिक लोग घायल हुए हैं. घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं कि थाने के भीतर इतना बड़ा धमाका कैसे हुआ. क्या यह आतंकी हमला था या जांच के दौरान किसी लापरवाही ने आधी रात को तबाही मचा दी.
सूत्रों के अनुसार नौगाम थाना परिसर में धमाका उस समय हुआ जब पुलिस और फोरेंसिक टीम फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल से बरामद किए गए विस्फोटक की जांच कर रही थी. बताया गया कि जम्मू कश्मीर पुलिस फरीदाबाद के डॉ मुजम्मिल गणई के किराए के घर से तीन सौ साठ किलो विस्फोटक सामग्री जब्त कर वापस श्रीनगर लाई थी. इसी सामग्री का नमूना लिया जा रहा था.
धमाका रात करीब ग्यारह बजकर तीस मिनट पर हुआ. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार विस्फोट इतना तेज था कि आसपास की इमारतें भी हिल गईं. कई मीटर दूर तक शवों के टुकड़े बिखरे मिले. घटनास्थल का मंजर दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार ब्लास्ट जैसा दिखा.
इस विस्फोट ने एक और बड़ा सवाल खड़ा किया है कि क्या नौगाम ब्लास्ट का दिल्ली ब्लास्ट से कोई संबंध है. जांच के शुरुआती संकेत यही बताते हैं. दिल्ली ब्लास्ट में जिस अमोनियम नाइट्रेट का इस्तेमाल हुआ था, नौगाम में भी फोरेंसिक टीम उसी अमोनियम नाइट्रेट का नमूना ले रही थी. मृतकों में ज्यादातर पुलिसकर्मी और फोरेंसिक अधिकारी शामिल हैं. श्रीनगर प्रशासन के एक नायब तहसीलदार समेत दो अधिकारियों की भी मौत हुई है. आशंका है कि मृतकों की संख्या और बढ़ सकती है.
धमाके के बाद सुरक्षा बलों ने क्षेत्र को घेर लिया. खोजी कुत्तों की मदद से परिसर की गहन जांच शुरू कर दी गई है. फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि विस्फोटक के साथ काम करते समय कोई तकनीकी गलती हुई या इसके पीछे कोई और वजह थी.
यह भी महत्वपूर्ण है कि फरीदाबाद टेरर मॉड्यूल का खुलासा सबसे पहले नौगाम पुलिस ने ही किया था. इसी थाने द्वारा जैश ए मोहम्मद के पोस्टर लगाने वाले मॉड्यूल का पर्दाफाश किया गया था. इस सुराग ने बाद में जांच एजेंसियों को फरीदाबाद से करीब दो हजार नौ सौ किलो विस्फोटक बरामद करने में मदद की. इसी मामले में कई डॉक्टर आतंकी भी गिरफ्तार हुए थे. अक्टूबर में गिरफ्तार किया गया आरोपी अदील अहमद राठेर कश्मीर में बाहरी लोगों और सुरक्षा बलों पर हमलों की धमकी देने वाले पोस्टर लगा रहा था. यही नेटवर्क बाद में दिल्ली ब्लास्ट में भी सक्रिय पाया गया.
नौगाम ब्लास्ट ने सुरक्षा व्यवस्थाओं और विस्फोटक हैंडलिंग में गंभीर खामियों को उजागर किया है. इतनी बड़ी मात्रा में बरामद किया गया विस्फोटक थाने में रखकर उसका नमूना लेना अपने आप में जोखिम भरा कदम था. जांच एजेंसियों की ओर से अपनाई गई प्रक्रियाओं पर भी सवाल उठ रहे हैं. इस हादसे ने दिल्ली से फरीदाबाद और श्रीनगर तक फैले टेरर नेटवर्क की जटिलता को फिर सामने ला दिया है. यह भी साफ हुआ है कि आतंकी मॉड्यूल पहले से ज्यादा तकनीकी रूप से सक्षम हो चुके हैं. सुरक्षा तंत्र के लिए यह बड़ा चेतावनी संकेत है कि विस्फोटक बरामदगी और जांच अब पहले की तरह साधारण प्रक्रिया नहीं रह गई है.