दोनों शवों को सुबह के समय अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरी जांच के बाद
दोनों शवों को सुबह के समय अस्पताल लाया गया था। डॉक्टरी जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया, लेकिन कई घंटों तक शवों को मॉर्चरी भेजने की प्रक्रिया पूरी नहीं की गई। इमरजेंसी वार्ड के कर्मी और प्रशासनिक अधिकारी इस मामले में आपसी समन्वय की कमी दिखाते रहे।
बीच किसी ने इस पूरे घटनाक्रम की सूचना विधायक प्रतिनिधि
इसी बीच किसी ने इस पूरे घटनाक्रम की सूचना विधायक प्रतिनिधि को दी। सूचना मिलते ही वे मौके पर पहुंचे और अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। उन्होंने कहा कि यह स्थिति बेहद शर्मनाक है — जहां एक ओर मरीज अपनी जिंदगी बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं, वहीं उनके बगल में मृत शरीर रखे हैं।
विधायक प्रतिनिधि ने मौके पर मौजूद अस्पताल प्रबंधन
विधायक प्रतिनिधि ने मौके पर मौजूद अस्पताल प्रबंधन को फटकार लगाते हुए कहा कि, “एमजीएम अस्पताल जैसे बड़े संस्थान में ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इमरजेंसी वार्ड में शवों का इस तरह पड़ा रहना न सिर्फ अमानवीय है, बल्कि यह प्रशासन की संवेदनहीनता को दर्शाता है।”
उन्होंने तत्काल ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से जवाब
उन्होंने तत्काल ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टरों और कर्मचारियों से जवाब मांगा, और शवों को मॉर्चरी शिफ्ट कराने का आदेश दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने आनन-फानन में दोनों शवों को मॉर्चरी भेजा।
इस घटना से एक बार फिर एमजीएम अस्पताल की कार्यप्रणाली और व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं। मरीजों के परिजनों ने कहा कि इमरजेंसी वार्ड में हर दिन भीड़ रहती है, लेकिन स्टाफ की कमी और प्रशासनिक लापरवाही से हालात बिगड़ते जा रहे।