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  • 2025-10-31

Bihar Elections: बिहार चुनाव में एनडीए और महागठबंधन की नजर अति पिछड़ों पर, संकल्प पत्रों में रोजगार, महिला और ईबीसी के लिए बड़े वादे

Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव में एनडीए ने शुक्रवार को अपना संकल्प पत्र जारी कर दिया. उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पटना में इसे लॉन्च किया जिसमें एक करोड़ सरकारी नौकरी और रोजगार का वादा प्रमुख है. अति पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए दस लाख रुपये आर्थिक सहायता और सुप्रीम कोर्ट रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति गठन का ऐलान हुआ. यह समिति ईबीसी की सामाजिक आर्थिक स्थिति का आकलन कर कल्याण के सुझाव देगी. ईबीसी युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट प्रोग्राम भी शुरू होगा. जननायक कर्पूरी ठाकुर के नाम पर किसान सम्मान निधि में राज्य से तीन हजार रुपये अतिरिक्त देने की घोषणा की गई. मत्स्य योजना में केंद्र के 4500 के साथ राज्य से 4500 रुपये मिलेंगे. महिलाओं के लिए जीविका दीदियों को दस हजार रुपये आरंभिक सहायता और दो लाख तक अतिरिक्त मदद का वादा है. शहरों में भी योजना विस्तार होगा.

महागठबंधन ने अलग से जारी किया ईबीसी के लिए संकल्प पत्र
महागठबंधन ने पहले ही ईबीसी के लिए अलग संकल्प पत्र जारी किया जिसमें दस बड़े वादे हैं. अति पिछड़ा अत्याचार निवारण अधिनियम पारित करना पंचायत नगर निकाय में आरक्षण 20 से 30 प्रतिशत बढ़ाना आबादी अनुपात में आरक्षण के लिए कानून को नौवीं अनुसूची में डालना एनएफएस को अवैध घोषित करना समावेशन मामलों के लिए कमेटी भूमिहीनों को शहर में तीन गांव में पांच डेसिमल जमीन प्राइवेट स्कूल में आरक्षित सीटों का आधा हिस्सा ईबीसी एससी एसटी पिछड़ा को 25 करोड़ तक ठेकों में 50 प्रतिशत आरक्षण निजी शिक्षण संस्थानों में आरक्षण शामिल हैं. नाई, कुम्हार, बढ़ई, लोहार, माली, मोची जैसे मेहनतकशों को स्वरोजगार के लिए पांच साल में पांच लाख ब्याज मुक्त राशि का वादा है. जीविका दीदियों को हर महीने 2500 रुपये कम्युनिटी मोबलाइजर को पक्की नौकरी 32 हजार वेतन कर्ज माफी और दो साल ब्याज मुक्त लोन की घोषणा है. मुकेश सहनी को डिप्टी सीएम चेहरा बनाकर निषाद समाज साधा गया.

बिहार में ईबीसी की 36 प्रतिशत आबादी
बिहार में ईबीसी की 36 प्रतिशत आबादी 112 जातियों जैसे केवट, लोहार, कुम्हार, कानू, धीमर, रैकवार, तुरहा, बाथम, मांझी, सहनी, प्रजापति, बढ़ई, सुनार, कहार, धानुक, नोनिया, राजभर, नाई, चंद्रवंशी, मल्लाह, की है. ये छोटी जातियां फिलर की भूमिका निभाती हैं और बड़े वोट बैंक से जुड़कर ताकत बनती हैं. नीतीश कुमार ने इन्हें साधकर 20 साल सत्ता संभाली लेकिन अब पकड़ कमजोर है. महागठबंधन तेजस्वी के नेतृत्व में इसे अपने पाले लाने की कोशिश कर रहा है.

नीतीश हर सभा में करते हैं जीविका दीदी का जिक्र
नीतीश हर सभा में जीविका की 1.40 करोड़ महिलाओं का जिक्र करते हैं जो अर्थव्यवस्था में भूमिका निभा रही हैं. हर परिवार की एक महिला को पसंद का रोजगार के लिए दस हजार और चलने पर दो लाख अतिरिक्त मदद दी जा रही है. 26 सितंबर को 75 लाख दीदियों को दस हजार ट्रांसफर हुए तीन अक्टूबर को 25 लाख और छह अक्टूबर को 21 लाख को सहायता मिली. कुल 1.21 करोड़ महिलाओं को दस हजार करोड़ दिए गए. 2007 में शुरू जीविका में 11 लाख 44 हजार समूह बने हैं. केंद्र की दीनदयाल अंत्योदय योजना से जुड़ी यह परियोजना महिलाओं को खेती, पशुपालन, मत्स्य, मुर्गी, शहद, अगरबत्ती, मोमबत्ती, मधुबनी पेंटिंग, सिलाई में प्रोत्साहित करती है.

दोनों ही गठबंधन का फोकस ईबीसी और युवा वोटर्स पर
एनडीए और महागठबंधन के संकल्प पत्र ईबीसी महिला और युवा पर फोकस कर वोट बैंक मजबूत करने की रणनीति दिखाते हैं. एनडीए का दस लाख सहायता और समिति व्यावहारिक लगती है लेकिन महागठबंधन के आरक्षण बढ़ोतरी और कर्ज माफी महत्वाकांक्षी हैं. जीविका पर दोनों की मेहरबानी महिला वोटरों को प्रभावित करेगी. ईबीसी की 36 प्रतिशत आबादी निर्णायक है और नीतीश की पकड़ कमजोर होने से महागठबंधन को फायदा मिल सकता है. कुल मिलाकर वादे आकर्षक हैं लेकिन अमल पर जनता की नजर रहेगी क्योंकि पिछली सरकारों में घोषणाएं अधर में लटकी रहीं.
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