Giridih Breaking: गिरिडीह जिले में मनरेगा योजना के तहत हुए लगभग आठ करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में जल्द ही एफआईआर दर्ज होने की संभावना है. सरकार के शीर्ष स्तर से आरोपियों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई की प्रक्रिया अंतिम चरण में है. यह मामला तीन साल पुराना है जब जांच के बाद आरोपियों को केवल अर्थ दंड और अन्य प्रकार के दंड दिए गए थे, लेकिन वित्तीय अनियमितता के इस बड़े घोटाले में कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं किया गया था.
जानकारी के अनुसार सदर प्रखंड में 2023 के वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने मार्च में नियमों की अवहेलना कर मनरेगा के लिए आवंटित राशि से आठ गुना अधिक राशि निकाली गई. इस दौरान मजदूरी और सामग्री के तय अनुपात की सीमा को दरकिनार कर कंक्रीट वर्क को प्राथमिकता दी गई, जिससे सीमेंट, बालू और अन्य सामग्रियों के आपूर्तिकर्ता भारी लाभान्वित हुए. जांच में बीडीओ, बीपीओ, मुखिया, रोजगार सेवक, कम्प्यूटर ऑपरेटर, सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता को दोषी पाया गया.
जांच के बाद सदर प्रखंड की चार पंचायतों करहरबारी, गादी श्रीरामपुर, अगदोनी कला और बदगुंदा खुर्द में कार्रवाई की गई और आरोपियों को अर्थ दंड लगाया गया. उपायुक्त ने संबंधित पंचायतों से राशि वसूल कर ट्रेजरी में जमा कराने का आदेश दिया, लेकिन पूरी घोटाले की राशि अब तक वसूली नहीं जा सकी.
यह मामला मनरेगा जैसी महत्वपूर्ण योजना में वित्तीय अनुशासन की कमी और प्रशासनिक लापरवाही को उजागर करता है. जहां नियमों की अवहेलना कर बड़ी राशि का निकासी की गई, वहीं निवारक और दंडात्मक कदम इतने कमजोर थे कि घोटाले पर कोई असर नहीं पड़ा. यह घटना दर्शाती है कि आर्थिक अपराध और सरकारी अनियमितताओं के मामले में प्रभावी और समय पर कार्रवाई की आवश्यकता है. अब जब आपराधिक मुकदमा दर्ज होने की प्रक्रिया अंतिम चरण में है, तो उम्मीद की जा रही है कि दोषियों को कानून के तहत जवाबदेह ठहराया जाएगा और भविष्य में ऐसे घोटालों को रोकने के लिए प्रशासनिक सतर्कता बढ़ेगी.