Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव की तैयारियां अब निर्णायक दौर में पहुंच चुकी हैं. दूसरे चरण के नामांकन पत्रों की स्क्रूटनी आज की जाएगी. इस चरण में 20 जिलों की 122 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है. राज्य भर से 2600 से अधिक उम्मीदवारों ने अपना नामांकन दाखिल किया है. यह चरण राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसमें वे सीटें शामिल हैं जहां हर बार सत्ताधारी गठबंधन और विपक्ष के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिलता है.
निर्वाचन आयोग के अनुसार नामांकन वापसी की अंतिम तारीख 23 अक्टूबर निर्धारित की गई है. यानी जो उम्मीदवार चुनावी मैदान से हटना चाहते हैं, वे उस दिन तक अपना नाम वापस ले सकेंगे. गौरतलब है कि पहले चरण में कुल 2443 उम्मीदवारों ने नामांकन किया था जिनमें से 467 उम्मीदवारों के नाम स्क्रूटनी के दौरान रद्द कर दिए गए थे. शेष 1976 प्रत्याशी ही वैध पाए गए थे. अब दूसरे चरण की जांच पर सबकी निगाहें टिकी हैं क्योंकि इससे यह तय होगा कि कौन-कौन से चेहरे वास्तविक चुनावी जंग में उतरेंगे.
इस चरण में सभी प्रमुख दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. राष्ट्रीय जनता दल ने 143 सीटों पर, कांग्रेस ने 61 सीटों पर और सीपीआई (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन ने 20 सीटों पर उम्मीदवार उतारे हैं. वहीं मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी ने 15 सीटों पर अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. वामपंथी खेमे में सीपीआई ने 9 और सीपीआई (मार्क्सवादी) ने 4 सीटों पर प्रत्याशी घोषित किए हैं. इसके अलावा भारतीय समावेशी पार्टी ने भी 4 सीटों पर अपने उम्मीदवारों को उतारा है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूसरे चरण में कई हाई-प्रोफाइल सीटें शामिल हैं जहां नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर लगी है. इन सीटों पर जातीय समीकरण, स्थानीय मुद्दे और गठबंधन की रणनीति तीनों ही निर्णायक भूमिका निभाएंगे. बीजेपी और जेडीयू इस बार अपने पुराने गढ़ों को बचाने की चुनौती में है, जबकि महागठबंधन के दल मतदाताओं को परिवर्तन का संदेश देने में जुटे हैं.
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि दूसरे चरण में कई निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में हैं जो प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ सकते हैं. चुनावी माहौल में पोस्टर, बैनर और रैलियों की गूंज से पूरा बिहार इस वक्त राजनीतिक रंग में रंगा हुआ है.
पिछले चुनावों की तरह इस बार भी बिहार का चुनावी परिदृश्य पूरी तरह जातीय और विकास आधारित मुद्दों के बीच झूलता नजर आ रहा है. एनडीए जहां अपनी उपलब्धियों और केंद्र की योजनाओं के बल पर मैदान में है, वहीं महागठबंधन महंगाई, बेरोजगारी और कानून व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर मतदाताओं को साधने की कोशिश कर रहा है.
बिहार के मतदाता पारंपरिक रूप से राजनीतिक रूप से सजग माने जाते हैं. ऐसे में दूसरे चरण की स्क्रूटनी और उसके बाद उम्मीदवारों की अंतिम सूची यह तय करेगी कि इस बार कौन-सी राजनीतिक ताकत राज्य के भविष्य की दिशा तय करेगी.