Election Commission: आगामी बिहार विधानसभा चुनाव और सात राज्यों की आठ विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव को लेकर निर्वाचन आयोग ने तैयारियां तेज कर दी हैं. आयोग ने स्वतंत्र, पारदर्शी और निष्पक्ष मतदान प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए 300 से अधिक केंद्रीय पर्यवेक्षकों की तैनाती की है. इन पर्यवेक्षकों में सामान्य और पुलिस पर्यवेक्षक शामिल हैं, जो मतदान क्षेत्रों में प्रत्येक गतिविधि पर कड़ी नजर रखेंगे.
निर्वाचन आयोग ने बताया कि यह नियुक्तियां संविधान के अनुच्छेद 324 और लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 20B के तहत की गई हैं. आयोग का उद्देश्य किसी भी प्रकार की पक्षपातपूर्ण स्थिति, दबाव या अनियमितता को रोकना है, ताकि सभी प्रत्याशियों को समान अवसर प्राप्त हो सके.
बिहार चुनाव के पहले चरण के लिए 121 सामान्य पर्यवेक्षक और 18 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं. वहीं दूसरे चरण के लिए 122 सामान्य पर्यवेक्षक और 20 पुलिस पर्यवेक्षक तैनात किए गए हैं. साथ ही जम्मू-कश्मीर, ओडिशा सहित सात राज्यों में हो रहे आठ विधानसभा उपचुनावों के लिए 8 सामान्य और 8 पुलिस पर्यवेक्षक भेजे गए हैं.
सूत्रों के मुताबिक, सभी पर्यवेक्षक अपने आवंटित निर्वाचन क्षेत्रों का पहला निरीक्षण पूरा कर चुके हैं और अब दोबारा सक्रिय निगरानी में लौट आए हैं. उन्हें निर्देश दिया गया है कि मतदान केंद्रों का नियमित दौरा करें, मतदाताओं की सुविधा सुनिश्चित करें और नई व्यवस्थाओं, जैसे दिव्यांग व वरिष्ठ नागरिकों के लिए विशेष सुविधा, की सही व्यवस्था की समीक्षा करें.
निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि पर्यवेक्षक न केवल मतदान प्रक्रिया की निगरानी करेंगे, बल्कि राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों और मतदाताओं की शिकायतों पर भी तत्काल कार्रवाई करेंगे. पारदर्शिता आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी.
निर्वाचन आयोग की यह सख्त तैयारी बताती है कि इस बार चुनावी प्रक्रिया पर विशेष निगरानी रखी जाएगी. बड़ी संख्या में पर्यवेक्षकों की तैनाती से यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि आयोग निष्पक्षता को मजबूत करना चाहता है. बिहार में यह कदम राजनीतिक टकराव और धांधली की संभावनाओं को कम करेगा. साथ ही उपचुनावों में भी एक समान मानक का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता बनी रहे.