Ghatshila By-Election: घाटशिला उपचुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई बनाते हुए झामुमो ने पूरी ताकत झोंक दी है. शुक्रवार को झामुमो उम्मीदवार सोमेश सोरेन द्वारा नामांकन दाखिल करने के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने घाटशिला के सर्कस मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया.
सीएम ने जनता से अपील की कि ऐसा मतदान करें कि विरोधी दल की जमानत तक जब्त हो जाए. उन्होंने याद दिलाया कि पिछले चुनाव में घाटशिला की जनता ने झामुमो उम्मीदवार रामदास सोरेन को भारी मतों से विजयी बनाया था और इस बार भी वोटों का बंटवारा नहीं होना चाहिए.
भाजपा पर सीधा वार
हेमंत सोरेन ने भाजपा पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि देशभर के अलग-अलग राज्यों से लगभग एक दर्जन मुख्यमंत्री घाटशिला में डेरा डाले हुए हैं. उन्होंने तंज कसा, “अगर दो दर्जन मुख्यमंत्री भी आ जाएं, तब भी मैं अकेला इन पर भारी पड़ूंगा.” उन्होंने विपक्ष को चेतावनी देते हुए कहा कि वे आग का गोला छोड़ने को तैयार बैठे हैं, लेकिन हम ऐसा छक्का मारेंगे कि वह गोला वहीं से दूर जा गिरेगा जहां से आया होगा.
रामदास सोरेन को किया याद
सीएम ने दिवंगत झामुमो नेता रामदास सोरेन को याद करते हुए कहा कि यह संयोग दुखद है कि गुरुजी शिबू सोरेन के निधन के कुछ ही दिनों बाद रामदास सोरेन का भी निधन हो गया और दोनों का देहांत दिल्ली में हुआ. उन्होंने अपना भाषण संथाली भाषा में भी दिया, जिससे आदिवासी समुदाय से गहरा जुड़ाव दिखा.
मुख्यमंत्री ने योजनाओं का किया जिक्र
सभा में हेमंत सोरेन ने सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए जनता को उनकी उपलब्धियों की याद दिलाई.
* मंईंयां सम्मान योजना का जिक्र करते हुए कहा कि यह योजना महिलाओं के सम्मान और सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम है.
* बिजली बिल माफी योजना के फायदे बताते हुए कहा कि इससे लाखों परिवारों को राहत मिली.
* पंडित रघुनाथ मुर्मू जनजातीय विश्वविद्यालय की स्थापना का वादा दोहराया.
* लोकसभा चुनाव से पहले बिना वजह जेल भेजे जाने का आरोप लगाया और कहा कि यह राजनीतिक साजिश थी.
घाटशिला की यह रैली केवल चुनावी सभा नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश का मंच भी थी. हेमंत सोरेन ने खुद को एक अकेले योद्धा के रूप में प्रस्तुत किया जो केंद्र और भाजपा के खिलाफ सीधा मुकाबला करने को तैयार है. उनकी भाषा में राजनीतिक चुनौती और भावनात्मक अपील का मिश्रण साफ झलक रहा था. आदिवासी पहचान, योजनाओं की उपलब्धि और व्यक्तिगत संघर्ष, इन तीन तत्वों के जरिए उन्होंने मतदाताओं को साधने की कोशिश की.
झामुमो इस उपचुनाव को केवल सीट जीतने की लड़ाई के रूप में नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व और नेतृत्व की प्रतिष्ठा से जोड़ रहा है.