Durgapur Gang Rape Case: पश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में MBBS छात्रा से हुए कथित गैंगरेप मामले में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा सामने आया है. इस पूरे मामले में जिस छात्रा को पीड़ित माना जा रहा है, उसी के कथित बॉयफ्रेंड का नाम भी आरोपी के रूप में शामिल हो गया है. पुलिस जांच में वॉट्सएप चैट्स ने यह साफ किया है कि गिरफ्तार छह आरोपियों में से एक युवक पीड़िता का क्लासमेट और बॉयफ्रेंड था. 10 अक्टूबर की रात यह दोनों कॉलेज कैंपस से साथ निकले थे और डेट पर गए थे.
यह खुलासा पुलिस ने गुरुवार को किया. जांच अधिकारियों के अनुसार, पीड़िता और उसका दोस्त जंगल की ओर गए थे. बताया गया कि दोनों श्मशान घाट के पास स्थित जंगल क्षेत्र में पहुंचे, उसी दौरान तीन अन्य युवक वहां आ गए. कुछ ही मिनटों में स्थिति नाटकीय रूप से बदल गई और वारदात घटित हो गई.
बयान बार-बार बदलने से जांच संदिग्ध
पुलिस अधिकारियों ने खुलासा किया कि पीड़िता और उसके बॉयफ्रेंड ने कई बार अपने बयान बदले हैं. उनके अलग-अलग बयानों ने जांच को और जटिल बना दिया है. जांचकर्ताओं को शक है कि कहीं न कहीं सच्चाई को छिपाने की कोशिश की जा रही है या फिर कहानी को किसी और दिशा में मोड़ने का प्रयास हो रहा है.
गुरुवार को पुलिस ने एक बार फिर घटनास्थल यानी जंगल क्षेत्र को घेराबंदी कर सुरक्षित किया. पहले एक सीमित क्षेत्र को सील किया गया था, लेकिन अब जांच के लिए अतिरिक्त इलाके को भी चिन्हित कर घेरा गया है. पुलिस ने पीड़िता के क्लासमेट समेत सभी आरोपियों से लगातार कई चरणों में पूछताछ की.
14 अक्टूबर को बॉयफ्रेंड की गिरफ्तारी
पुलिस ने 14 अक्टूबर को पीड़िता के कथित बॉयफ्रेंड वासिफ अली को गिरफ्तार किया. इससे पहले मुख्य आरोपी सफीक एसके को गिरफ्तार किया जा चुका था. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि सफीक की बड़ी बहन रोजीना ने अपने भाई को पकड़वाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. बताया गया कि 13 अक्टूबर को सफीक अंडाल पुल के नीचे बहन से मिलने पहुंचा, वहीं पुलिस को सूचना देकर उसकी गिरफ्तारी सुनिश्चित की गई.
दूसरे आरोपियों में एसके रियाजुद्दीन, अपू बरुई और फिरदौस एसके को 12 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया. रियाजुद्दीन पहले उसी मेडिकल कॉलेज में गार्ड था जहां पीड़िता पढ़ती है, लेकिन लगभग पांच साल पहले उसे नौकरी से निकाल दिया गया था.
मंगलवार को पुलिस टीम सभी आरोपियों और छात्रा के मित्र को घटनास्थल पर लेकर गई, जहां उनसे कहा गया कि वे 10 अक्टूबर की रात की घटनाओं को दोहराएं, ताकि यह समझा जा सके कि किसका क्या रोल था और सच क्या है.
मामले की संवेदनशील दिशा
यह मामला सिर्फ एक क्रूर अपराध तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब इसमें रिश्तों की जटिलता, कहानी के उलझे हुए पक्ष और सच्चाई की कई परतें सामने आ रही हैं. वॉट्सएप चैट्स, कॉलेज कैंपस से निकले कदम, जंगल तक पहुंचना और फिर अचानक से तीन अज्ञात युवकों का वहां आना, ये सब संकेत देते हैं कि घटना में सिर्फ बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि नजदीकी चेहरों की भूमिका भी हो सकती है.
दुर्गापुर गैंगरेप केस की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है जहां पीड़िता और आरोपी के बीच संबंधों ने पूरे मामले की दिशा बदल दी है. पहले यह पूरी तरह एक बाहरी हमले और अपराध की कहानी लग रही थी, लेकिन अब इसका केंद्र पीड़िता और उसके निकट संबंधों के बीच छिपी सच्चाई पर आ गया है.
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या घटना पहले से योजनाबद्ध थी, क्या इसमें विश्वासघात की भूमिका थी, या फिर यह किसी विवाद का दुखद परिणाम है. बयान बदलने, चैट्स छिपाने और जंगल जैसी एकांत जगह पर रात में जाने जैसे कारक इस मामले को एक क्रिमिनल केस से आगे बढ़ाकर एक मनोवैज्ञानिक और सामाजिक उलझन में बदल रहे हैं.
जांच को अब सिर्फ अपराधियों को पकड़ने की नहीं, बल्कि सत्य और भ्रम के बीच भेद करने की चुनौती है. यह केस आने वाले दिनों में न्याय व्यवस्था, युवा संबंधों की जटिलता और सोशल मीडिया चैट्स पर लिखी बातों की कानूनी अहमियत, तीनों पहलुओं को कटघरे में खड़ा करेगा.