Jamshedpur: आज स्वदेशी मेले के समापन समारोह में मुख्य अथिति झारखण्ड के पूर्व मुख्य मंत्री बाबू लाल मरांडी जी, विशिष्ट अथिति विधायक सरयू राय, प्रदेश के पूर्व अध्यक्ष दिनेशानंद गोस्वामी जी रहे। सत्य की अध्यक्षता मुरलीधर केडिया जी ने की मां संचालन पंकज सिंह जी ने किया और धन्यवाद ज्ञापन संजीत सिंह ने किया।
हमारे मुख्य अथिति बाबूलाल मरांडी जी ने कहा कि स्वदेशी मेला 2025 आत्मनिर्भर भारत की भावना को सशक्त करता जन-आंदोलन है। महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिया गया स्वदेशी का संदेश आज फिर से आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है।
वक्ताओं ने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें। भारत को “सोने की चिड़िया” कहा जाता था —
एक समय भारत की हिस्सेदारी विश्व अर्थव्यवस्था में एक-तिहाई थी।
अंग्रेजों के दो सौ वर्षों के शासन में लगभग 45 ट्रिलियन डॉलर की संपत्ति भारत से बाहर ले जाई गई।
आज जब भारत पुनः उभरती वैश्विक अर्थव्यवस्था का नेतृत्व कर रहा है,
तो यह आवश्यक है कि हम अपनी उत्पादन क्षमता, स्थानीय उद्योग और कारीगरों को सशक्त करें। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के “वोकल फॉर लोकल” और “आत्मनिर्भर भारत” अभियानों का उल्लेख करते हुए कि
यह केवल सरकारी नीतियाँ नहीं, बल्कि राष्ट्रीय चेतना के पुनर्जागरण का प्रतीक हैं।
सरयू राय जी ने कहा कि स्वदेशी जागरण मंच के तत्वावधान में आयोजित अठारहवां स्वदेशी मेला 2025 भव्यता और उत्साह के साथ संपन्न हुआ। वर्ष 1991 में प्रारंभ हुआ स्वदेशी अभियान आज एक जनांदोलन का रूप ले चुका है।महात्मा गांधी द्वारा स्वतंत्रता संग्राम के दौरान दिया गया स्वदेशी का संदेश आज फिर से आर्थिक स्वतंत्रता और आत्मनिर्भरता का आधार बन रहा है। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आवश्यक है कि आम नागरिक अपने दैनिक जीवन में स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दें।
वर्ष 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब हर नागरिक स्वदेशी अपनाएगा। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मेला केवल उत्पादों की प्रदर्शनी नहीं, बल्कि भारतीय कला, संस्कृति और उद्यमशीलता का उत्सव है। देश के विभिन्न कोनों से आए लघु उद्योगों और कारीगरों ने अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया, जिनमें पर्यावरण–अनुकूल वस्तुएँ, हस्तशिल्प, वस्त्र, कृषि–उत्पाद और स्थानीय नवाचारों को प्रमुखता दी गई।
डॉ दिनेशनंद गोस्वामी जी ने कार्यक्रम में यह आह्वान किया कि
त्योहारों के अवसर पर दीपावली के दीपक, झालर, पूजन–सामग्री या उपहार सभी स्वदेशी उत्पादों से ही खरीदे जाएँ। इससे न केवल देश के उत्पादकों को सहयोग मिलेगा, बल्कि रोज़गार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बल मिलेगा। स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग सिर्फ एक आर्थिक निर्णय नहीं, बल्कि राष्ट्र सेवा का कार्य है।जब हम अपने देश में निर्मित वस्तुएँ खरीदते हैं,
तो हम अपने किसान, मजदूर, कारीगर और उद्योगपति के जीवन को समृद्ध करते हैं। हर घर में स्वदेशी वस्तुओं के उपयोग को बढ़ावा देना ही विकसित भारत की दिशा में सबसे बड़ा योगदान है।
समरोप में मंच के राष्ट्रीय परिषद सदस्य मनोज सिंह अखिल भारतीय सह पर्यावरण प्रमुख बंदे शंकर सिंह जी और मेले के संयोजक अशोक गोयल जी ने भी अपना उद्बोधन रखा। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से अमित मिश्रा अमरनाथ सिंह राजपति देवी विकास जायसवाल विकास सिंह रिंकू देवी सरिता देवी कंचन सिंह गौरव कुमार मुकेश कुमार घनश्याम दास अमित कुमार रमेश कुमार संदीप कुमार इत्यादि उपस्थित रहे।