चमक गया है स्कूल का कोना-कोना
पिछले एक महीने से स्कूल का हर कोना सृजन और रंगों से भर गया है. कोई बच्चा दीयों को गेरुए और पीले रंग में रंग रहा है, तो कोई मोमबत्ती पर डिजाइन उकेर रहा है. कहीं कक्षाओं में रंगों की महक है, तो कहीं बच्चों की हंसी और उत्साह गूंज रहा है. इन बच्चों के चेहरों पर जो चमक है, वह किसी दीये की लौ से कम नहीं. उनके लिए दीपावली सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि अपनी कला को दुनिया के सामने रखने का एक अवसर है.
हुनर नहीं किसी का मोहताज
स्कूल की प्राचार्या ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य बच्चों में आत्मनिर्भरता की भावना जगाना है. उन्हें सिखाया गया है कि हुनर किसी का मोहताज नहीं होता. मिट्टी, रंग और मोम के जरिए उन्होंने सीखा कि मेहनत और लगन से सपनों को साकार किया जा सकता है. खास बात यह है कि सभी दीपक और मोमबत्तियां पर्यावरण के अनुकूल हैं, जिनमें किसी भी प्रकार के हानिकारक पदार्थ का इस्तेमाल नहीं किया गया है.
पहले से आने लगे ऑर्डर
दीयों की यह रोशनी अब जमशेदपुर के कई घरों में पहुंचने वाली है. लोग बच्चों के बनाए इन दीयों को खरीदने के लिए पहले से ऑर्डर दे रहे हैं. किसी ने कहा कि यह दीये उनके घर में खुशियों का उजाला लाएंगे, तो किसी ने कहा कि इन्हें जलाने से दिल को सुकून मिलेगा क्योंकि इनके पीछे है मासूम मेहनत और सच्चा जज़्बा.
बच्चों के आत्मबल की चमक
स्कूल ऑफ होप की यह पहल समाज को यह संदेश देती है कि दिव्यांगता शरीर की नहीं, सोच की होती है. इन बच्चों ने साबित किया है कि अगर दिल में रोशनी हो, तो कोई अंधेरा टिक नहीं सकता. इस दीपावली, जब जमशेदपुर के घरों में ये दीये जलेंगे, तो हर लौ में इन बच्चों की मेहनत, उम्मीद और आत्मबल की चमक झिलमिलाएगी.