Jamshedpur: जमशेदपुर पश्चिमी के विधायक सरयू राय ने झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी को पत्र लिखकर एमजीएम मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों और उनके परिजनों के लिए पेयजल सहित बुनियादी जनसुविधाओं की स्थिति पर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने मंत्री से आग्रह किया है कि अस्पताल की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए एक सक्षम अनुश्रवण समिति का गठन किया जाए, जिसमें स्थानीय सांसद और विधायक भी शामिल हो।
सरयू राय ने अपने पत्र में लिखा कि 2024 के विधानसभा चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से अस्पताल का उद्घाटन जल्दबाज़ी में कराया गया, जबकि उस समय अस्पताल भवन अधूरा था और उसमें पानी की व्यवस्था तक नहीं थी। उन्होंने कहा कि “देश में यह शायद पहला अस्पताल होगा, जिसका उद्घाटन बिना पानी की व्यवस्था के किया गया।”
विधायक के अनुसार, उद्घाटन के बाद हड़बड़ी में पांच डीप बोरिंग कराए गए, जो तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टि से मानक के अनुरूप नहीं हैं। वर्तमान में इन्हीं बोरिंग से अस्पताल को पानी मिल रहा है, लेकिन यह पर्याप्त और सुरक्षित नहीं है। उन्होंने बताया कि बोरिंग का पानी आरओ के माध्यम से शुद्ध किया जा रहा है, लेकिन आरओ सिस्टम घटिया गुणवत्ता के हैं और पानी में घुले ठोस तत्वों की मात्रा खतरनाक स्तर पर है।
सरयू राय ने बताया कि पिछले पंद्रह दिनों से मरीजों और परिजनों की ओर से प्रतिदिन शिकायतें मिल रही हैं कि अस्पताल में पीने के पानी की नियमित आपूर्ति नहीं हो रही है। जब उन्होंने स्थिति की जानकारी ली तो पता चला कि भवन निर्माण करने वाली कंपनी एलएंडटी ने बेहद कमजोर और टिकाऊ नल व आरओ सिस्टम लगाए हैं, जो बार-बार खराब हो जाते हैं और जलापूर्ति बाधित रहती है।
उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल उद्घाटन के समय आसपास के लोगों ने डीप बोरिंग से भूगर्भ जलस्तर पर असर पड़ने की आशंका जताई थी, तब सरकार ने एक वर्ष के भीतर सतह जल आपूर्ति की वैकल्पिक व्यवस्था करने का आश्वासन दिया था। लेकिन अब उद्घाटन को एक साल बीतने के बाद भी वह व्यवस्था शुरू नहीं हो सकी है।
विधायक ने अपने पत्र में यह भी लिखा है कि फिलहाल वे अस्पताल की केवल मरीजों और उनके परिजनों से जुड़ी जनसुविधाओं की समस्या पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन अनुश्रवण समिति को दवाओं की उपलब्धता, मशीनों की स्थिति, पैथोलॉजिकल जांच, पैरामेडिकल स्टाफ़ और अन्य ज़रूरी व्यवस्थाओं की समीक्षा भी करनी चाहिए ताकि अस्पताल का संचालन विधिसम्मत और प्रभावी तरीके से हो सके।