Bihar Elections: बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा हो चुकी है, लेकिन राज्य की सियासत में सीटों को लेकर मचे घमासान ने दोनों गठबंधनों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. एनडीए और इंडिया गठबंधन, दोनों में ही सीट शेयरिंग को लेकर पेंच फंसा हुआ है. हालांकि इंडिया गठबंधन के कुछ नेताओं का दावा है कि फॉर्मूला लगभग तय हो चुका है और अब बस औपचारिक ऐलान बाकी है. वहीं एनडीए खेमे में सीटों पर खींचतान जारी है, जिससे बातचीत का दौर लंबा खिंच गया है.
सूत्रों के मुताबिक एनडीए में जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा की सीटों की मांग ने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. मांझी 18 सीटों पर अपनी दावेदारी जता रहे हैं, जबकि बीजेपी उन्हें केवल 7 या 8 सीटें देने के पक्ष में है. दूसरी ओर, उपेंद्र कुशवाहा की पार्टी रालोमो 15 सीटों की मांग पर अड़ी है. चिराग पासवान भी अपनी पार्टी के लिए 40 सीटों की मांग कर रहे हैं, लेकिन बीजेपी उन्हें सिर्फ 20 सीटें देने को तैयार बताई जा रही है. यह भी चर्चा है कि एक विधान परिषद और एक राज्यसभा सीट देकर समझौते की कोशिश हो सकती है.
बिहार भाजपा के चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान, जीतन राम मांझी, उपेंद्र कुशवाहा और ललन सिंह से मुलाकात कर चुके हैं. पार्टी नेतृत्व कोशिश कर रहा है कि किसी तरह यह विवाद जल्द सुलझ जाए ताकि गठबंधन एकजुट होकर चुनावी मैदान में उतर सके. फिलहाल स्थिति यह है कि बीजेपी और जेडीयू दोनों ही 103-103 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहते हैं, लेकिन छोटे सहयोगी दलों की डिमांडें तस्वीर को उलझा रही हैं.
वहीं दूसरी ओर इंडिया गठबंधन में भी सबकुछ आसान नहीं है. तेजस्वी यादव की आरजेडी 130 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में है, जबकि कांग्रेस के लिए 55 सीटों पर सहमति बनाने की कोशिश की जा रही है. हालांकि कांग्रेस अपनी कुछ पुरानी सीटें छोड़ना नहीं चाहती और कई ऐसी सीटों पर बदलाव चाहती है जो लंबे समय से बीजेपी के कब्जे में हैं. इनमें पटना साहिब, कुम्हरार और गया जैसी सीटें शामिल हैं जो पहले कांग्रेस के हिस्से में रही हैं. अब देखना यह है कि आरजेडी कांग्रेस की मांग मानती है या नहीं, इस पर आज शाम तेजस्वी यादव के आवास पर होने वाली बैठक में चर्चा हो सकती है.
उधर मुकेश सहनी की वीआईपी पार्टी ने भी अपनी मांगों का पिटारा खोल दिया है. पहले 60 सीटों की मांग करने वाले सहनी अब 20 सीटों और डिप्टी सीएम पद की मांग कर रहे हैं. वहीं माकपा ने भी अपनी सीटों की मांग 4 से बढ़ाकर 11 कर दी है और कुल मिलाकर वाम दल अब 35 सीटों की मांग कर रहे हैं.
झामुमो (JMM) ने सात सीटों की मांग रखी है, जिनमें बांका, कटोरिया, चकाई, पूर्णिया, धमदाहा और मनिहारी जैसी सीटें शामिल हैं जहां 2020 के चुनाव में आरजेडी दूसरे नंबर पर रही थी. झामुमो की इस मांग ने आरजेडी के समीकरणों को और पेचीदा बना दिया है.
इधर पशुपति कुमार पारस की पार्टी भी पांच सीटों की मांग पर अड़ी है. कुल मिलाकर बिहार का चुनावी गणित इस वक्त बेहद उलझा हुआ है. हर पार्टी अपनी जमीन मजबूत करने की कोशिश में है और दोनों गठबंधन अपने-अपने सहयोगियों को साधने की कवायद में जुटे हैं. अब देखना होगा कि कौन-सा गठबंधन पहले अपने पत्ते खोलता है और कौन इस सीटों की सियासी खींचतान में नुकसान उठा बैठता है.