Bihar Breaking: बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. राज्य में 22.7 लाख महिला मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए हैं. यह कदम आने वाले चुनाव पर बड़ा असर डाल सकता है.
बिहार में कुल 3.5 करोड़ महिला मतदाता हैं. तुलना करें तो पुरुष मतदाताओं में सिर्फ 15.5 लाख नाम हटाए गए हैं, जबकि उनकी संख्या 3.92 करोड़ है. यानी महिलाओं के नाम हटाने का आंकड़ा पुरुषों के मुकाबले कहीं अधिक है.
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब सत्तारूढ़ एनडीए (भाजपा-जदयू गठबंधन) महिलाओं के कल्याण को चुनावी एजेंडे का बड़ा हिस्सा बना रहा है. 3 अक्टूबर को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने “मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना” के तहत 25 लाख महिलाओं के खाते में 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए. यह योजना 29 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद 26 सितंबर को शुरू हुई थी और फिलहाल इसके एक करोड़ से अधिक लाभार्थी हैं.
इन जिलों में सबसे अधिक कटौती
जिला-वार आंकड़ों पर नजर डालें तो गोपालगंज में महिलाओं के नाम सबसे ज्यादा काटे गए. यहां 15.1 प्रतिशत यानी लगभग 1.5 लाख नाम हटाए गए. इसके बाद मधुबनी में 1.3 लाख और पूर्वी चंपारण में 1.1 लाख महिला मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए. यह वहां की महिला वोटर संख्या में करीब 6.7 प्रतिशत की कमी है. इसी तरह सारण और भागलपुर में भी लगभग एक-एक लाख महिलाओं के नाम हटाए गए हैं.
गोपालगंज, मधुबनी, पूर्वी चंपारण, सारण, भागलपुर और पटना में महिलाओं के नाम सबसे ज्यादा कटे हैं. ये जिले मिलकर 59 विधानसभा सीटों पर असर डालते हैं. 2020 के विधानसभा चुनाव में इनमें से 25 सीटें विपक्षी महागठबंधन के खाते में गई थीं, जबकि एनडीए ने 34 सीटों पर जीत हासिल की थी.