Delhi Unsafe For Women: देश की राजधानी दिल्ली एक बार फिर से महिलाओं के लिए असुरक्षित बताई जा रही है. यह बात एनसीआरबी की हालिया रिपोर्ट में साफ दिखाई देता है. देश की राजधानी दिल्ली में जहां सबसे ज्यादा पढ़ें लिखें लोग रहते है वह अब महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं है. अब सवाल लाजमी है कि आखिर देश की राजधानी को क्या हो गया है कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रही. क्या इसमें पुलिस और प्रशासन की लापरवाही है या फिर लोगों में अब सीविक सेंस और सोशल एटिकेट्स की कमी है.
इस देश में एक ओर महिलाओं को न्याय और अधिकार दिलाने की बात होती है वहीं दूसरी ओर महिलाओं पर अत्याचार किया जाता है. इसके साथ ही मेनस्ट्रीम मिडिया ने तो महिलाओं को विलन बनाने का ठेका ले ही लिया है. जैसे ही ये पता चलता है कि किसी महिला ने अपराध किया है. मेनस्ट्रीम मिडिया उसे हाईलाईट कर अपना बिजनेस चमकाती है.
आपको मेनस्ट्रीम मिडिया में यह डिबेट नहीं देखने को मिलेगी कि महिलाओं पर कितने अत्याचार हुए, न्याय दिलाने के लिए कितने लोग आए और कितने केस दर्ज हुए. लेकिन आपको धर्म के नाम पर उन्माद जरुर देखने को मिलेगा. हिंदू धर्म में महिलाओं को देवी का दर्जा दिया गया है लेकिन आज कल लोग धर्म तो ठीक से मान नहीं रहे हैं तो महिलाओं की इज्जत और उनकी सुरक्षा कैसे करेंगे? आज महिलाओं के लिए समाज असुरक्षित हो गया है.
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की डेटा पर नजर डालें तो महिलाओं के प्रति अपराध भारतीय महानगरों में बढ़ रहे हैं. पटना, बेंगलुरु जैसे शहरों में बलात्कार, छेड़छाड़, घरेलु हिंसा और साइबर उत्पीड़न के मामले बढ़ें है. भारत में महिला सुरक्षा की स्थिति बेहतर होने की जगह और गर्त में ही जा रही है.
रिपोर्ट में यह बताया गया है कि भारत के 19 महानगरों में साल 2023 में महिलाओं के खिलाफ कुल 51,393 मामले दर्ज हुए. वहीं 48,755 मामले साल 2022 में दर्ज किए गए. आकंड़ों पर गौर किया जाए तो 2023 में मामलों में 5.4 फीसदी की वृद्धि हुई है.
डेटा में यह भी साफ होता है कि महिलाओं के खिलाफ 19 महानगरों में दर्ज अपराधों में सबसे अधिक केस पति या उनके रिश्तेदारों की तरफ से की गई, जो प्रताड़ना से संबंधित हैं. इस तरह के कुल 15,813 मामले दर्ज हुए. इसके साथ ही बड़ी संख्या में नाबालिग लड़कियां भी शहरों में अपराध की शिकार हुई हैं. पॉस्को अधिनियम के तहत ऐसे मामलों में 7,305 मामले दर्ज हुए.
अगर पुरे देश में महिलाओं खिलाफ दर्ज मामलों की बात करें तो कुल 4,48,211 मामले दर्ज हुए, जो साल 2022 की तुलना में 0.7 फीसदी की बढ़ोतरी दर्शाता है.
सबसे असुरक्षित शहर रहा दिल्ली
महिलाओं के खिलाफ दिल्ली में अपराधों में 5.7 फीसदी की गिरावट हुई, लेकिन फिर भी देश की राजधानी लगातार तीसरे साल महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित मेगा सिटी होने का स्थान बरकरार रखा. दिल्ली में महिलाओं के खिलाफ साल 2023 में कुल 13,366 मामले दर्ज हुए, यह देश के अन्य बड़े महानगरों के मुकाबले काफी अधिक हैं. दहेज प्रताड़ना, बलात्कार, छेड़छाड़, उत्पीड़न और दहेज हत्या जैसे मामले इनमें शामिल हैं.
बेंगलुरु और मुंबई में भी बढ़ा अपराध
दिल्ली के बाद महिलाओं के खिलाफ अपराध के मामले मुंबई और बेंगलुरु में दर्ज किए गए. मुंबई में 6,025 और बेंगलुरु में 4,870 मामले दर्ज हुए. बताते चलें कि मुंबई और बेंगलुरु को मिलाकर भी दिल्ली में दर्ज हुए मामलों की संख्या कहीं ज्यादा अधिक हैं. वहीं कोजीकोडे में 627, चेन्नई में 745 और कोयंबटूर में 244 मामले दर्ज हुए.
एनसीआरबी की डेटा चिंताजनक हैं, इस मॉडर्न जामने में भी महिलाएं अत्याचार का शिकार हो रहीं हैं. समाज का शिक्षित होने का क्या फायदा जब महिलाओं को अपमान किया जाए और उन्हें कोर्ट तक घसीटा जाए. महान टीआरपी धारी पत्रकार न इस पर चर्चा करेंगे और न ही उन्हें इस डेटा से कोई मतलब है. देश में महिलाओं को लेकर लचर न्याय व्यवस्था भी सवालों के घेरे में नजर आती है. सर्वोच्च न्यायालय का एक कठोर फैसला महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों के मन में कानून का भय पैदा कर सकता है. इसके साथ ही समाज में कोई भी महिलाओं के खिलाफ अपराध करने के बारे में सौ बार सोचेगा. देश की संसद को इस आवाज पर बुलंद कर और भी कठोर कानून बनाने की आवश्यकता हैं.