
बैठक में प्रतिमा विसर्जन की प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा हुई। एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) ने जानकारी दी कि स्वर्णरेखा नदी का जलस्तर इस समय बढ़ा हुआ है और ओडिशा स्थित ब्यांगबिल डैम से पानी छोड़े जाने की संभावना भी है। ऐसे में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए एनडीआरएफ की टीमों की तैनाती बड़े घाटों पर की जाएगी। इसके अलावा नाव और गोताखोर भी उपलब्ध रहेंगे ताकि किसी आपात स्थिति से निपटा जा सके। पूजा समितियों ने प्रशासन को आश्वस्त किया कि वे निर्धारित समय और मार्ग का पालन करते हुए मूर्ति विसर्जन करेंगे।
उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने कहा कि दुर्गोत्सव पूरे जिले में शांति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। उन्होंने पूजा समितियों से अपील की कि वे विसर्जन भी सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण तरीके से सम्पन्न कराएं। उन्होंने कहा कि आने वाले 36 घंटे बेहद अहम हैं और इस दौरान प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहेगा। दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारी लगातार निगरानी करेंगे।
सिटी एसपी कुमार शिवाशीष ने सभी थाना प्रभारियों को 02 अक्टूबर की सुबह फ्लैग मार्च निकालने और विसर्जन मार्ग की ड्रोन से निगरानी करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि विसर्जन मार्ग में किसी भी प्रकार की निर्माण सामग्री न रहे और ऊंची प्रतिमाओं के विसर्जन से पहले प्रतिमा व तोरणद्वार की ऊंचाई का मापन सुनिश्चित कर लिया जाए। साथ ही जुलूस में शामिल वाहन तकनीकी रूप से फिट और प्रमाणपत्र युक्त हों। किसी भी चालक या श्रद्धालु को नशे की हालत में पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
प्रशासन ने पूजा समितियों के वालंटियर्स को सक्रिय रहने की भी अपील की है ताकि शांति, अनुशासन और सुरक्षा के साथ प्रतिमा विसर्जन सम्पन्न कराया जा सके।