Government Of India: भारत पिछले कुछ दशकों में वैश्विक स्तर पर अपनी अहमियत लगातार बढ़ा रहा है. दुनिया के कई देश भारत की बढ़ती भूमिका और कूटनीतिक कौशल की सराहना कर रहे हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान भी भारत शांति वार्ता में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है. इसी बीच कई देश भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) का स्थायी सदस्य बनाने के पक्ष में आ चुके हैं.
हाल ही में रूस, भूटान, मॉरीशस, फ्रांस, अमेरिका, ब्रिटेन और यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने भारत के स्थायी सदस्य बनने का समर्थन किया. फिर सवाल उठता है कि आखिर अब तक भारत को यह दर्जा क्यों नहीं मिल पाया? इसके लिए पहले यह समझना जरूरी है कि सुरक्षा परिषद क्या है.
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद: दुनिया की सबसे शक्तिशाली संस्था
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) यूएन का सबसे प्रभावशाली अंग है. इसका मुख्य काम दुनिया में शांति और सुरक्षा बनाए रखना, अंतरराष्ट्रीय विवाद सुलझाना और जरूरत पड़ने पर प्रतिबंध या सैन्य कार्रवाई की अनुमति देना है. परिषद में कुल 15 सदस्य हैं, जिनमें 5 स्थायी सदस्य अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन के पास वीटो पावर हैं. इसका मतलब यह है कि अगर इनमें से कोई भी “ना” कह दे, तो प्रस्ताव पास नहीं हो सकता.
बाकी 10 सदस्य अस्थायी होते हैं, जिन्हें दो साल के लिए चुना जाता है. भारत अभी इस समूह का सदस्य है, लेकिन स्थायी नहीं.
भारत को समर्थन: रूस, मॉरीशस, भूटान, फ्रांस और अमेरिका
रूस ने स्पष्ट कहा कि सुरक्षा परिषद का ढांचा 80 साल पुराने वैश्विक संतुलन पर आधारित है, जो अब बदल चुका है. रूस ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता का समर्थन किया.
मॉरीशस के विदेश मंत्री धनंजय रामफुल ने कहा कि भारत अब एक प्रमुख वैश्विक खिलाड़ी बन चुका है और उसे स्थायी सीट मिलनी चाहिए. भूटान के प्रधानमंत्री त्शेरिंग तोबगे ने भी भारत और जापान को शामिल करने की बात कही.
फ्रांस ने बार-बार भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान के स्थायी सदस्य बनने का समर्थन किया. फ्रांस की उप-स्थायी प्रतिनिधि नाथाली ब्रॉडहर्स्ट ने कहा, संरचना ऐसी होनी चाहिए जो नई उभरती शक्तियों को समाहित करे. इससे परिषद की अधिकारिता और प्रभाव बढ़ेगा.
अमेरिका ने भी भारत के पक्ष में समर्थन जताया है. साल 2022 में तत्कालीन राष्ट्रपति जो बाइडेन ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अमेरिका भारत की स्थायी सदस्यता का समर्थन करता है.
भारत की सक्रियता और G4 सहयोग
भारत लगातार द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तर पर स्थायी सदस्यता के लिए प्रयास कर रहा है. यह Inter-Governmental Negotiations (IGN) में सक्रिय है और G-4 समूह (भारत, जापान, ब्राजील, जर्मनी) के साथ मिलकर समर्थन जुटा रहा है. साथ ही, ग्लोबल साउथ के कई देशों के साथ भी बातचीत जारी है.
कहां अटक रही बात?
UNSC में सुधार के लिए UN चार्टर में संशोधन जरूरी है. आर्टिकल 108 के अनुसार, महासभा के दो-तिहाई सदस्यों और सभी P5 सदस्यों की मंजूरी जरूरी है. यानी किसी एक स्थायी सदस्य का विरोध भी प्रक्रिया रोक सकता है.
यहां चीन बड़ी बाधा बनकर उभरा है. चीन नहीं चाहता कि भारत को स्थायी सदस्यता और वीटो पावर दोनों मिले, क्योंकि इससे एशिया में भारत का प्रभाव बढ़ जाएगा.
भारत का पक्ष
भारत लगातार कह रहा है कि वर्तमान संरचना (1945 की) अब वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती. परिषद में अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया का प्रतिनिधित्व न के बराबर है. भारत का तर्क है कि उसकी जनसंख्या, अर्थव्यवस्था, शांति अभियानों और वैश्विक भूमिका को देखते हुए उसे स्थायी सदस्यता मिलनी चाहिए.
वीटो पावर का सवाल
स्थायी सदस्यता मिलने के बावजूद वीटो पावर मिलना निश्चित नहीं है. वर्तमान में यह केवल P5 देशों के पास है. कुछ देशों का मानना है कि नए सदस्यों को वीटो न मिले, जबकि भारत चाहता है कि स्थायी सदस्य बनने पर उसे भी बराबरी का दर्जा मिले.
अस्थायी सदस्यता का अनुभव
भारत अब तक 8 बार अस्थायी सदस्य रहा है, जिनमें 1950-51 से लेकर 2021-22 तक कार्यकाल शामिल हैं. G4 देशों के साथ मिलकर भारत लगातार स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है.
भारत का वैश्विक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, लेकिन सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर का मामला अभी भी जटिल राजनीतिक समीकरणों में फंसा हुआ है. इसके बावजूद भारत की सक्रियता, समर्थन जुटाने की रणनीति और वैश्विक भूमिका इसे इस लक्ष्य के और करीब लाती रही है.