चुनाव आयोग का निर्देश, प्रशासनिक तैयारी चरम पर
चुनाव आयोग ने बिहार सरकार को एक पत्र लिखकर 6 अक्टूबर तक उन सभी अधिकारियों के तबादले और पोस्टिंग की प्रक्रिया को पूरा करने को कहा है जो तीन साल से एक ही स्थान पर कार्यरत हैं। इसके अलावा, उन अधिकारियों का भी तबादला किया जाएगा जिनके खिलाफ किसी तरह की शिकायतें दर्ज हैं। इस कदम को चुनाव आयोग की निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने की प्रतिबद्धता के रूप में देखा जा रहा है। सरकार भी आयोग के निर्देशों का पालन करते हुए तेजी से प्रशासनिक बदलाव कर रही है ताकि चुनाव की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता को प्रभावी ढंग से लागू किया जा सके।
राजनीतिक दलों की बढ़ी सरगर्मी
चुनाव तारीखों की घोषणा में देरी के बावजूद, सभी प्रमुख राजनीतिक दल अपनी चुनावी तैयारियों में पूरी तरह से जुट गए हैं। सत्ताधारी जनता दल (यूनाइटेड) और भारतीय जनता पार्टी का गठबंधन, विपक्ष के राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के नेतृत्व वाले महागठबंधन के सामने है। दोनों ही खेमे अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं।
जदयू-भाजपा गठबंधन अपनी सरकार
जदयू-भाजपा गठबंधन अपनी सरकार के पिछले पांच सालों के विकास कार्यों को जनता के सामने रख रहा है, जबकि राजद-कांग्रेस गठबंधन राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साध रहा है। नेताओं की रैलियां और सभाएं लगातार हो रही हैं, और सोशल मीडिया पर भी आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है।
संभावित चुनावी कार्यक्रम और सुरक्षा व्यवस्था
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव एक से दो चरणों में कराए जा सकते हैं। हालांकि, अंतिम निर्णय चुनाव आयोग ही लेगा। चुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद राज्य में सुरक्षा व्यवस्था को भी चाक-चौबंद किया जाएगा। केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की टुकड़ियां विभिन्न जिलों में तैनात की जाएंगी ताकि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।
चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा
चुनाव कार्यक्रम की औपचारिक घोषणा के साथ ही आदर्श आचार संहिता लागू हो जाएगी, जिससे राजनीतिक दलों के लिए कई तरह के प्रतिबंध लागू हो जाएंगे। इस घोषणा का सभी को बेसब्री से इंतजार है, क्योंकि इसके बाद ही चुनावी मुकाबले की तस्वीर और साफ हो पाएगी।