सरायकेला-खरसावां जिले में पुलिस ने दुर्गापूजा से पहले अवैध शराब पर कार्रवाई की बात कही है, लेकिन बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि अगर अवैध शराब की भट्ठियां पहले से ही संचालित थीं, तो पुलिस और प्रशासन अब तक क्या कर रहे थे? आखिरकार जब त्योहार सिर पर है तभी कार्रवाई क्यों हो रही है?
पुलिस के नाक के नीचे चल रहा था अवैध कारोबार
ईचागढ़ , खरसावां, नीमडीह और कुचाई थाना क्षेत्र में पुलिस ने 9 महुआ शराब भट्ठियां ध्वस्त करने और 890 किलो जावा महुआ नष्ट करने का दावा किया है। पुलिस का कहना है कि दुर्गापूजा जैसे पर्व में अवैध शराब की बिक्री रोकने के लिए यह कदम उठाया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह अवैध कारोबार पुलिस की नाक के नीचे इतने दिनों से फल-फूल नहीं रहा था? जब तक कार्रवाई नहीं हुई, तब तक आखिर किसकी शह पर ये भट्टियां चल रही थीं? क्या पुलिस को इसकी जानकारी नहीं थी या जानबूझकर आंखें मूँद ली गई थीं?
पुलिस की कार्रवाई सिर्फ एक दिखावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि अवैध शराब का धंधा लंबे समय से चल रहा है और प्रशासन की कार्रवाई केवल त्योहारों के पहले दिखावे तक ही सीमित रहती है। त्योहार के बाद ये कारोबार फिर से उसी तरह शुरू हो जाते हैं। अब सवाल यह है, अगर पुलिस और प्रशासन ईमानदारी से काम करते तो जिले में अवैध शराब का कारोबार इतनी आसानी से पनपता ही क्यों? कार्रवाई दिखाने की बजाय स्थायी समाधान कब होगा, यही अब जनता पूछ रही है।
न्यूज 26 की अपिल
अवैध शराब न केवल स्वास्थ्य के लिए घातक है बल्कि यह समाज में अपराध, घरेलू हिंसा और दुर्घटनाओं को भी बढ़ावा देती है। प्रशासनिक कार्रवाई सिर्फ त्योहारों तक सीमित न रहकर लगातार और पारदर्शी तरीके से होनी चाहिए, ताकि इस अवैध कारोबार की जड़ें हमेशा के लिए खत्म की जा सकें। जनता को भी ऐसी गतिविधियों की सूचना पुलिस को देनी चाहिए और मिलकर एक स्वस्थ, सुरक्षित और नशामुक्त समाज बनाने में सहयोग करें।