आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवार के लिए यह एक बड़ी मानवीय मदद साबित हुई, जिससे वे अपने बच्चे का पार्थिव शरीर सम्मानपूर्वक घर ले जा सके। यह घटना उन परिवारों की पीड़ा को उजागर करती है, जो न केवल अपने प्रियजनों को खोने के दुख से गुजर रहे होते हैं, बल्कि अस्पताल के भारी-भरकम बिलों के बोझ तले भी दब जाते हैं।
मर्सी अस्पताल में चल रहा था इलाज
इस मामले में, डॉली महतो के नवजात शिशु का इलाज मर्सी अस्पताल में चल रहा था, लेकिन दुर्भाग्यवश, बच्चे को बचाया नहीं जा सका। दुख की इस घड़ी में, परिवार के सामने अस्पताल का 76,555 रुपये का बकाया बिल चुकाने की चुनौती खड़ी हो गई, जिसे चुकाने में वे असमर्थ थे।
इसी नाजुक स्थिति में, झारखंड युवा मोर्चा के एक सक्रिय सदस्य विद्युत महतो ने इस मामले की जानकारी पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी को दी। षाड़ंगी ने तुरंत इस मामले की गंभीरता को समझा और मानवीयता के आधार पर अस्पताल प्रबंधन से बात की।
उन्होंने प्रबंधन से अनुरोध किया कि वे इस शोकाकुल परिवार की आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए बकाया राशि माफ कर दें। कुणाल षाड़ंगी के आग्रह और मानवीय अपील पर अस्पताल प्रबंधन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तुरंत कार्रवाई की।
प्रबंधन ने 76,555 रुपये की पूरी बकाया राशि माफ कर दी और परिवार को उनके बच्चे का पार्थिव शरीर सौंप दिया। इस निर्णय से न केवल परिवार को आर्थिक बोझ से मुक्ति मिली, बल्कि उन्हें अपने बच्चे का अंतिम संस्कार करने की गरिमा भी वापस मिली।
परिवार का पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी के प्रति आभार
परिवार के सदस्यों ने पूर्व विधायक कुणाल षाड़ंगी के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब वे दुख और लाचारी महसूस कर रहे थे, कुणाल षाड़ंगी ने एक सच्चे मददगार की तरह उनकी सहायता की। यह पहल दर्शाती है कि समाज में अभी भी ऐसे लोग हैं, जो बिना किसी स्वार्थ के जरूरतमंदों की मदद के लिए आगे आते हैं।
कुणाल षाड़ंगी ने इस घटना पर टिप्पणी करते हुए कहा कि एक जनप्रतिनिधि होने के नाते यह उनका कर्तव्य है कि वे अपने क्षेत्र के लोगों के दुख-सुख में उनके साथ खड़े रहें। उन्होंने कहा कि किसी भी परिवार को अपने प्रियजन को खोने के बाद आर्थिक परेशानियों का सामना नहीं करना चाहिए। उन्होंने मर्सी अस्पताल प्रबंधन का भी आभार व्यक्त किया, जिन्होंने मानवीयता और संवेदनशीलता दिखाते हुए इस मुश्किल घड़ी में परिवार की मदद की।
कुणाल षाड़ंगी की सराहनीय कदम
यह घटना घाटशिला में कुणाल षाड़ंगी की जन-सेवा और लोगों से जुड़े रहने की प्रतिबद्धता को मजबूत करती है। यह न केवल एक व्यक्तिगत मदद थी, बल्कि यह भी संदेश देती है कि समाज के प्रभावशाली लोगों को ऐसे मानवीय मामलों में आगे आना चाहिए, जिससे जरूरतमंदों को समय पर और सही मदद मिल सके। इस प्रकार के कदम से समाज में विश्वास और भाईचारा बढ़ता है, और लोग मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहारा बन सकते हैं।