Jharkhand Bhumihar Women Society: भूमिहार महिला समाज द्वारा सावन महोत्सव की शुरुआत बड़े ही पारंपरिक तरीके से दीप प्रज्वलन और गणेश वंदना से की गई। इसके बाद महिलाओं और बच्चियों द्वारा सावन के गीतों पर लोकनृत्य प्रस्तुत किया गया। झूलों और हरियाली के प्रतीक के रूप में पंडाल को सुंदर तरीके से सजाया गया था।
महिला समाज द्वारा विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया, जिनमें सभी वर्गों की महिलाओं और बच्चियों ने प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मकता का प्रदर्शन करते हुए सुंदर पारंपरिक और आधुनिक डिज़ाइन बनाए, महिलाएं पारंपरिक हरे परिधान, गहनों और सजावट के साथ मंच पर उतरीं। सावन की थीम के अनुसार परंपरागत श्रृंगार को प्राथमिकता दी गई।
झारखंड की संस्कृति, पर्व और सावन से जुड़ी रोचक जानकारियों पर आधारित प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता आयोजित की गई।
महिलाओं और बच्चियों ने "कजरी", "झूला", और "बरसात" से जुड़े पारंपरिक लोकगीत प्रस्तुत किए, समाज के वरिष्ठ सदस्यों और समाजसेवा में योगदान देने वाली महिलाओं को विशेष सम्मानित किया गया।
पूरे कार्यक्रम में पारंपरिक गीत, नृत्य और हरे-भरे परिधानों की छटा छाई रही। महिलाओं ने झूला झूलते हुए, गीत गाते हुए सावन का स्वागत किया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह हरियाली और उमंग से झारखंड भूमिहार महिला समाज द्वारा इस महोत्सव का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, परंपरा और आपसी भाईचारे को बढ़ावा देना है। यह आयोजन महिलाओं के सशक्तिकरण और उनकी सांस्कृतिक भागीदारी को बढ़ावा देने था।