Haivaan Review: प्रियदर्शन की फिल्म हैवान एक ऐसी थ्रिलर है, जिसमें लड़ाई से ज्यादा दिमाग का खेल दिखता है. 2 घंटे 44 मिनट की यह फिल्म शुरू होने के बाद धीरे धीरे अपना तनाव बढ़ाती है. कहानी में डर, खामोशी और बच निकलने की कोशिश साथ चलती है. फिल्म केवीएन प्रोडक्शंस और थेस्पियन फिल्म्स के बैनर तले बनी है. कहानी इस तरह आगे बढ़ती है कि दर्शक लगातार सोचता रहता है कि अगला कदम कौन उठाएगा.
परशुराम और श्याम के बीच शुरू होता है खेल
कहानी परशुराम और श्याम के इर्द गिर्द घूमती है. परशुराम बहुत चालाक है. वह हर कदम सोचकर उठाता है. श्याम देख नहीं सकता. लेकिन उसकी सुनने की ताकत बहुत तेज है. वह आवाज और आहट से आसपास की हलचल समझ लेता है. यही बात दोनों के मुकाबले को अलग बनाती है. यहां सिर्फ ताकत काम नहीं आती. हर आवाज और हर छोटी हलचल कहानी में मायने रखती है. फिल्म का सस्पेंस भी इसी खेल से बनता है.
अक्षय और सैफ ने संभाली कहानी
परशुराम के किरदार में अक्षय कुमार ने ज्यादा बोलने के बजाय अपने हाव भाव से असर पैदा किया है. उनकी खामोशी ही किरदार को डरावना बनाती है. श्याम के रोल में सैफ अली खान भी मजबूत नजर आते हैं. उन्होंने दृष्टिहीन किरदार को सहज तरीके से निभाया है. आवाज पहचानने और आहट पकड़ने का उनका अंदाज खास है. दोनों के आमने सामने वाले सीन फिल्म की जान हैं. इनके अलावा पहल चौधरी, बोमन ईरानी, सैयामी खेर और श्रिया पिलगांवकर ने भी कहानी को मजबूती दी है. पुलिस अफसर के रोल में शारिब हाशमी सहज लगे हैं. असरानी का किरदार कहानी में भावनात्मक पहलू जोड़ता है.
संगीत और निर्देशन ने बढ़ाया सस्पेंस
प्रीतम का बैकग्राउंड स्कोर फिल्म के माहौल को और तनाव भरा बनाता है. खासकर सस्पेंस वाले हिस्सों में संगीत बेचैनी बढ़ाता है. फिल्म प्रियदर्शन की मलयालम फिल्म ओप्पम का हिंदी रूपांतरण है. हालांकि इसे हिंदी दर्शकों के हिसाब से नए अंदाज में पेश किया गया है. अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं, जहां कहानी के साथ दिमाग भी चलता रहे, तो हैवान आपको पसंद आ सकती है. अक्षय कुमार और सैफ अली खान की जोड़ी और प्रियदर्शन का निर्देशन फिल्म को एक थ्रिलर के तौर पर मजबूत बनाते हैं.