MPSC Exam Controversy: महाराष्ट्र में MPSC परीक्षा को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्रों को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी का समर्थन मिला है. उन्होंने आरोप लगाया कि पेपर लीक, लंबित भर्तियों और महंगी शिक्षा जैसे मुद्दों से छात्रों का सिस्टम पर भरोसा कमजोर हुआ है. राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि महाराष्ट्र में हजारों छात्र शांतिपूर्वक सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं. उनके मुताबिक, यह विवाद सिर्फ एक परीक्षा या भर्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यवस्था पर टूटे भरोसे का मामला है.
राहुल गांधी ने BJP सरकारों पर निशाना साधते हुए पेपर लीक और रुकी हुई भर्तियों का मुद्दा उठाया. उन्होंने शिक्षा की बढ़ती फीस, हॉस्टल की खराब व्यवस्था, खाने की गुणवत्ता, DBT में कथित फ्रॉड और MPSC जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता को लेकर भी सवाल खड़े किए.
उन्होंने कहा कि छात्रों के बेहतर भविष्य से जुड़ी उनकी मांगों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए और तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए.
FDA इंस्पेक्टर परीक्षा को लेकर विवाद
महाराष्ट्र में यह प्रदर्शन MPSC की FDA इंस्पेक्टर स्क्रीनिंग परीक्षा में कथित गड़बड़ी को लेकर भी जुड़ा है. 22 मार्च को छह मंडल मुख्यालयों पर परीक्षा ऑफलाइन हुई थी. 12 जून को रिजल्ट जारी होने के बाद इंटरव्यू पूरे किए गए और 488 उम्मीदवारों की प्रोविजनल जनरल मेरिट लिस्ट जारी हुई. इसके बाद 22 से 26 जुलाई के बीच आयोग को उम्मीदवारों और जनप्रतिनिधियों की ओर से शिकायतें मिलीं.
परीक्षा से पहले पेपर मिलने का आरोप
शिकायतों में आरोप लगाया गया कि कुछ उम्मीदवारों को 20 मार्च को ही परीक्षा के प्रश्न या प्रश्नपत्र मिल गए थे. बाद में इन्हें सोशल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों पर प्रसारित किए जाने का भी आरोप लगाया गया. इन शिकायतों के बाद मामले की जांच शुरू हुई.
क्राइम ब्रांच ने छह लोगों को किया गिरफ्तार
26 अगस्त को मुंबई क्राइम ब्रांच ने MPSC ड्रग इंस्पेक्टर ग्रुप-B परीक्षा की गोपनीयता भंग करने के मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया. इस मामले में आरोपी रुतुजा पाटिल को नंदुरबार से हिरासत में लिए जाने की भी जानकारी सामने आई है. मामला महाराष्ट्र प्रतियोगी परीक्षा में गलत कामों की रोकथाम अधिनियम, 2024 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के तहत दर्ज किया गया है.
राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों की आवाज सुनकर जल्द फैसला लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि अगर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो छात्रों का आंदोलन और तेज हो सकता है.