Hazaribagh News: कोल ब्लॉक कंपनी और कंपनी के पक्ष में चल रही कथित प्रशासनिक गतिविधियों के विरोध में कर्णपुरा जल, जंगल, जमीन बचाव संघर्ष समिति की ओर से महापंचायत आयोजित की गई। महापंचायत के समर्थन में बादम मुख्य बाजार सहित क्षेत्र की कई दुकानें बंद रहीं। कार्यक्रम में बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र के कई गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, किसान, मजदूर और रैयत शामिल हुए।
दर्जनों गांवों से पहुंचे ग्रामीण और रैयत
महापंचायत की अध्यक्षता सबूर महतो ने की, जबकि मंच का संचालन रवि दांगी ने किया। कार्यक्रम में बादम, गोंदलपुरा, हरली, सांढ़ समेत बड़कागांव पूर्वी क्षेत्र के दर्जनों गांवों से महिला-पुरुषों ने हिस्सा लिया।
सभा में रैयतों ने कोल ब्लॉक के लिए क्षेत्र में चल रही गतिविधियों को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी सहमति के बिना जमीन से जुड़ी किसी भी गतिविधि को स्वीकार नहीं किया जाएगा। महापंचायत में जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा के साथ रैयतों के अधिकारों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कही गई।
कथित प्रशासनिक गतिविधियों और CISF की मौजूदगी पर सवाल
महापंचायत में मौजूद मिथिलेश दांगी ने केंद्र सरकार की ओर से एमएमडीआर, सीबीए समेत विभिन्न कानूनों के जरिए कोयला कंपनियों को प्रोत्साहित किए जाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र के ग्रामीण और रैयत अपने अधिकारों से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेंगे।
मिथिलेश दांगी ने चरही और बड़कागांव क्षेत्र में कंपनी के हित में कथित प्रशासनिक गतिविधियों और कैंप किए जाने को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि इलाके में पहले से बड़ी संख्या में लोग बेरोजगारी की समस्या से जूझ रहे हैं। साथ ही, CISF की गतिविधियों को लेकर भी स्थानीय लोगों में असंतोष बढ़ने का दावा किया।
जमीन जिसकी, मालिक वही के सिद्धांत पर जोर
मिथिलेश दांगी ने कहा कि “जमीन जिसकी, मालिक वही” के सिद्धांत के तहत यदि रैयत अपनी जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं, तो जमीन अधिग्रहण से जुड़ी गतिविधियां क्यों की जा रही हैं। उन्होंने कथित फर्जी मुकदमों का विरोध करने की बात भी कही।
महापंचायत के दौरान कोल कंपनी और उसके पक्ष में चल रही कथित गतिविधियों को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी देखने को मिली। आयोजकों ने कार्यक्रम में हजारों ग्रामीणों की मौजूदगी का दावा किया।
2 अक्टूबर को सामूहिक उपवास का ऐलान
संघर्ष समिति की ओर से घोषणा की गई कि 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती को सामूहिक उपवास दिवस के रूप में मनाया जाएगा। समिति ने कहा कि जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा रैयतों के अधिकारों के लिए आंदोलन आगे भी शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।
महापंचायत के अंत में ग्रामीणों ने अपनी जमीन, अधिकारों और प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का सामूहिक संकल्प लिया।