Jharkhand Voter List Controversy: झारखंड में SIR की प्रक्रिया के बीच मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 के कथित इस्तेमाल को लेकर विवाद खड़ा हो गया है. झारखंड राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष हिदायतुल्लाह खान ने मामले का संज्ञान लेते हुए पूरे राज्य में शिकायतों की निष्पक्ष जांच की मांग की है.
हिदायतुल्लाह खान का आरोप है कि कुछ जगहों पर बिना उचित सत्यापन के बड़ी संख्या में फॉर्म-7 जमा कराने की कोशिश की जा रही है. उन्होंने कहा कि खास तौर पर अल्पसंख्यक, आदिवासी और दलित मतदाताओं के नाम हटाने की कथित कोशिश गंभीर मामला है.
हिदायतुल्लाह खान के मुताबिक, जुगसलाई नगर परिषद क्षेत्र के बूथ नंबर 166 की BLO के घर 10 से ज्यादा लोग पहुंचे थे.
आरोप है कि इन लोगों ने खुद को BLA-2 बताते हुए BLO पर फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया.
बताया गया कि BLO ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया. इसके बाद कथित तौर पर उनसे कहा गया कि सत्यापन बाद में कर लिया जाएगा और फिलहाल फॉर्म पर साइन कर दें.
मामले की जांच के लिए बनी टीम
आयोग अध्यक्ष के संज्ञान में मामला आने के बाद पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन ने जांच के लिए टीम गठित की.
जुगसलाई नगर परिषद कार्यालय में भी इस मामले को लेकर बैठक हुई. इसमें शिकायत की जांच और आगे की कार्रवाई पर चर्चा की गई.
हिदायतुल्लाह खान का कहना है कि पूछताछ के दौरान खुद को BLA-2 बताने वाले लोगों में से एक ने कथित तौर पर बताया कि उसे भाजपा की ओर से पूरे जिले में घूमने का निर्देश दिया गया था.
इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं हुई है. संबंधित पक्ष का आधिकारिक जवाब भी सामने आना बाकी है.
सरकारी कर्मचारी पर भी दबाव बनाने का आरोप
आयोग अध्यक्ष ने एक अन्य आरोप भी लगाया है. उनके मुताबिक, जुगसलाई नगर परिषद के एक कथित कर्मचारी अमित साहू ने फोन कर BLO पर फॉर्म-7 पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया.
आरोप है कि हस्ताक्षर नहीं करने पर बाद में परेशानी होने की बात कही गई.
हिदायतुल्लाह खान ने सवाल उठाया कि किसी सरकारी कर्मचारी को BLO पर किसी फॉर्म पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाने का अधिकार किसने दिया.
पहले से भरे फॉर्म-7 पर भी सवाल
आयोग अध्यक्ष ने फॉर्म-7 को लेकर एक और गंभीर सवाल उठाया है.
उनका कहना है कि कुछ फॉर्म में मतदाताओं के नाम पहले से प्रिंट होने की शिकायत मिली है. उन्होंने सवाल किया कि अगर मतदाता से जुड़ी जानकारी पहले से दर्ज थी, तो यह विवरण संबंधित लोगों तक कैसे पहुंचा.
उन्होंने इसे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता से जुड़ा मामला बताते हुए जांच की मांग की है.
2003 की वोटर लिस्ट वाले मतदाताओं का मुद्दा
हिदायतुल्लाह खान ने दावा किया कि कुछ ऐसे लोगों से भी दोबारा फॉर्म-6 जमा करने को कहा जा रहा है, जिनका नाम 2003 की मतदाता सूची में मौजूद था और जिन्होंने मैपिंग के बाद अपना फॉर्म जमा कर दिया था.
उन्होंने कहा कि इस मामले की भी जांच होनी चाहिए और यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि दोबारा फॉर्म जमा कराने की जरूरत क्यों पड़ रही है.
कई जिलों से शिकायत मिलने का दावा
आयोग अध्यक्ष के मुताबिक, गोड्डा, साहिबगंज, पाकुड़, चतरा, गढ़वा समेत कई जिलों से फॉर्म-7 के कथित गलत इस्तेमाल की शिकायतें मिल रही हैं.
उन्होंने कहा कि पूरे मामले को किसी एक जिले तक सीमित करके नहीं देखा जाना चाहिए. शिकायतों की व्यापक स्तर पर जांच जरूरी है.
हिदायतुल्लाह खान ने राज्य सरकार, निर्वाचन अधिकारियों और जिला निर्वाचन पदाधिकारियों से मामले में तत्काल कार्रवाई की मांग की है.
उन्होंने कहा कि अब तक जमा किए गए संदिग्ध फॉर्म-7 की जांच की जानी चाहिए. जांच पूरी होने तक ऐसे फॉर्मों पर कोई अंतिम कार्रवाई नहीं होनी चाहिए.
अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता या साजिश सामने आती है, तो संबंधित फॉर्म निरस्त करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग भी उन्होंने की है. हिदायतुल्लाह खान ने कहा कि अगर जांच में किसी व्यक्ति की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि इसमें राजनीतिक कार्यकर्ता, सरकारी कर्मचारी या कोई अन्य व्यक्ति शामिल हो, जांच के बाद कानून के मुताबिक कार्रवाई की जानी चाहिए.
उनका कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और उचित सत्यापन बेहद जरूरी है.