Back to Top

Facebook WhatsApp Telegram YouTube Instagram
Push Notification

🔔 Enable Notifications

Subscribe now to get the latest updates instantly!

Jharkhand News26 – fastest emerging e-news channel.
  • 2026-09-03

Jharkhand News: झारखंड के नए विश्वविद्यालय कानून में कॉलेजों के लिए कड़े मानक, दाखिले से लेकर संचालन तक नियम तय

Jharkhand News: झारखंड राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के तहत राज्य के कॉलेजों की संबद्धता, मान्यता और संचालन को लेकर कई नए प्रावधान किए गए हैं। नए कानून का उद्देश्य कॉलेजों में शैक्षणिक गुणवत्ता, आधारभूत सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था के लिए निर्धारित मानकों को लागू करना है। इसके तहत कॉलेजों को तय नियमों का लगातार पालन करना होगा।


कॉलेजों में जमीन, भवन और जरूरी सुविधाएं अनिवार्य

नए प्रावधानों के मुताबिक कॉलेजों के पास पर्याप्त जमीन और भवन के साथ प्रयोगशाला, पुस्तकालय, जरूरी पुस्तकों की उपलब्धता, स्वास्थ्य केंद्र, छात्रावास, व्यायामशाला और CCTV जैसी सुविधाएं होनी चाहिए। इन संसाधनों के संचालन और रखरखाव के लिए संस्थान के पास पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था भी जरूरी होगी।

दाखिले के मामले में भी कॉलेजों को निर्धारित सीमा का पालन करना होगा। तय क्षमता से अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश नहीं दिया जा सकेगा। छात्र संख्या विश्वविद्यालय, UGC और राज्य सरकार के निर्धारित मानकों के अनुरूप रखनी होगी। शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों की संख्या तथा उनकी योग्यता के लिए भी निर्धारित मापदंड लागू होंगे।

कॉलेज बंद करने या स्थान बदलने के लिए लेनी होगी मंजूरी

नए कानून के तहत कोई कॉलेज विश्वविद्यालय और राज्य सरकार की अनुमति के बिना अपना स्थान परिवर्तित नहीं कर सकेगा। इसी तरह कॉलेज के प्रबंधन का हस्तांतरण भी संबंधित अनुमति के बिना संभव नहीं होगा।


किसी संस्थान को अपनी इच्छा से बंद करने की भी अनुमति नहीं होगी। संबद्धता समाप्त होने या कॉलेज बंद किए जाने की स्थिति में उसके प्रबंधन पर मुआवजे से संबंधित जिम्मेदारी भी तय की जा सकती है।

संबद्ध कॉलेजों की नियमित निगरानी करेगा बोर्ड

संबद्ध कॉलेजों की शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था पर नजर रखने के लिए संबद्ध महाविद्यालय बोर्ड का प्रावधान किया गया है। यह बोर्ड कॉलेजों में पढ़ाई, उपलब्ध सुविधाओं और प्रशासनिक व्यवस्था का निरीक्षण करेगा।

इसके अलावा राज्य के ऐसे क्षेत्रों में जहां उच्च शिक्षा की पर्याप्त सुविधा उपलब्ध नहीं है, वहां संस्थानों के विकास की योजना बनाने के लिए हर पांच वर्ष में Perspective Plan तैयार किया जाएगा। इससे उच्च शिक्षण संस्थानों के विस्तार और क्षेत्रीय संतुलन पर ध्यान दिया जाएगा।

बेहतर प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को स्वायत्तता का विकल्प

शैक्षणिक स्तर पर बेहतर प्रदर्शन करने वाले कॉलेजों को UGC के नियमों के तहत स्वायत्त कॉलेज या सशक्त स्वायत्त कॉलेज का दर्जा दिए जाने का प्रावधान है। स्वायत्तता मिलने के बाद पात्र संस्थानों को पाठ्यक्रम तैयार करने, शिक्षण की नई पद्धतियां अपनाने और परीक्षा आयोजित करने में अधिक स्वतंत्रता मिल सकेगी।

नए कानून के प्रावधानों से संबद्ध कॉलेजों के लिए केवल मान्यता हासिल करना पर्याप्त नहीं रहेगा। उन्हें शैक्षणिक गुणवत्ता, कर्मचारियों की उपलब्धता, आधारभूत ढांचे, सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े मानकों को भी लगातार बनाए रखना होगा।

WhatsApp
Connect With WhatsApp Cannel !