जापानी विमान ऐसे पहुंचेंगे जोधपुर
जापान के F 2A विमान फुकुओका के त्सुइकी एयर बेस से उड़ान भरेंगे. इसके बाद वे ओकिनावा के नाहा एयर बेस और थाईलैंड के रास्ते भारत आएंगे. विमानों को करीब 5600 किलोमीटर की दूरी तय करनी होगी. इस दौरान हवा में ईंधन भरने की सुविधा का इस्तेमाल किया जाएगा. अमेरिकी वायुसेना के टैंकर विमान इसमें मदद करेंगे. यह तैनाती सितंबर की शुरुआत से महीने के अंत तक चलेगी. इससे जापानी वायुसेना को लंबी दूरी के अभियान का व्यावहारिक अनुभव भी मिलेगा.
सुखोई और F 2A के बीच होगा अभ्यास
अभ्यास में भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 MKI और जापान के F 2A विमान शामिल होंगे. दोनों देशों के पायलट अलग अलग परिस्थितियों में हवाई युद्ध का अभ्यास करेंगे. F 2A जापान का प्रमुख बहुउद्देश्यीय लड़ाकू विमान है. इसे मित्सुबिशी ने अमेरिकी F 16 के आधार पर विकसित किया है. अभ्यास के दौरान दोनों देशों के पायलट एक दूसरे की संचालन पद्धति और युद्ध रणनीति को समझेंगे. इससे दोनों वायुसेनाओं के बीच तालमेल और आपसी भरोसा बढ़ाने में मदद मिलेगी.
2023 में जापान गया था सुखोई
Veer Guardian 2026 भारत और जापान के बीच पहले हुए हवाई अभ्यास की अगली कड़ी है. साल 2023 में भारतीय वायुसेना के सुखोई 30 MKI विमानों ने जापान जाकर संयुक्त अभ्यास में हिस्सा लिया था. हिंद प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों के बीच इस अभ्यास को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. भारत और जापान स्वतंत्र और खुले हिंद प्रशांत क्षेत्र के समर्थक हैं. दोनों देश जमीन, समुद्र और अब हवाई क्षेत्र में भी रक्षा सहयोग बढ़ा रहे हैं. Veer Guardian 2026 से पायलटों की युद्ध तैयारी और निर्णय लेने की क्षमता को बेहतर करने के साथ तकनीकी सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा में भी मदद मिलने की उम्मीद है.