Jharkhand Delimitation: झारखंड में विधानसभा सीटों के परिसीमन और आदिवासी आरक्षित सीटों की संख्या को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। भाजपा के प्रदेश महामंत्री अमर बावरी ने कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के उन दावों को खारिज किया है, जिनमें ST सीटों की संख्या घटने की आशंका जताई जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित 50 प्रतिशत मॉडल के तहत विधानसभा सीटों की कुल संख्या बढ़ने के साथ आदिवासी आरक्षित सीटों में भी इजाफा हो सकता है।
अमर बावरी के मुताबिक, वर्तमान में झारखंड विधानसभा में 81 सीटें हैं। 50 प्रतिशत मॉडल लागू होने की स्थिति में इनकी संख्या बढ़कर 121 हो सकती है। इसी अनुपात में ST सीटें 28 से बढ़कर 42 होने की संभावना है। यानी आदिवासी समाज के लिए 14 अतिरिक्त ST सीटें मिल सकती हैं। उन्होंने SC सीटों की संख्या भी 9 से बढ़कर 14 होने की बात कही।
2008 के परिसीमन का हवाला
भाजपा नेता ने 2008 के परिसीमन का जिक्र करते हुए कहा कि उस समय झारखंड में आदिवासी आबादी के अनुपात में कमी आई थी। इसके आधार पर ST सीटों को 28 से घटाकर 22 करने का प्रस्ताव सामने आया था। उन्होंने दावा किया कि उस समय भाजपा ने आदिवासी आरक्षित सीटों को बनाए रखने के लिए कांग्रेस सरकार का समर्थन किया था।
कांग्रेस-JMM से पूछा वैकल्पिक मॉडल का सवाल
अमर बावरी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि आज पार्टी आदिवासी सीटों के घटने की आशंका जता रही है, जबकि उसे 2008 के घटनाक्रम को लेकर झारखंड की जनता और आदिवासी समाज से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कांग्रेस और JMM से सवाल किया कि यदि वे 50 प्रतिशत मॉडल का विरोध कर रहे हैं तो उनके पास सीटों के पुनर्निर्धारण के लिए क्या वैकल्पिक मॉडल है।
उन्होंने कहा कि यदि केवल जनसंख्या के आधार पर परिसीमन किया गया तो आदिवासी आबादी का प्रतिशत कम होने के कारण ST सीटों की संख्या प्रभावित हो सकती है। ऐसे में विपक्ष को इस मुद्दे पर अपना स्पष्ट प्रस्ताव सामने रखना चाहिए।
आदिवासी हितों पर भाजपा ने गिनाईं उपलब्धियां
अमर बावरी ने कहा कि भाजपा ने आदिवासी समाज के हितों को प्राथमिकता दी है। उन्होंने झारखंड के गठन, बिरसा मुंडा की जयंती को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने और द्रौपदी मुर्मू के राष्ट्रपति बनने जैसे मुद्दों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भाजपा आदिवासी समाज को केवल रोजगार पाने वाला नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला वर्ग बनाने की दिशा में काम करने की पक्षधर है। इसके लिए केंद्र सरकार की स्टार्टअप और रोजगार से जुड़ी योजनाओं का लाभ आदिवासी युवाओं तक पहुंचाने पर जोर दिया जा रहा है।