Jharkhand Politics: झारखंड के नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने संथाल परगना में कथित बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा फिर उठाया है. उन्होंने 31 अगस्त को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र भेजकर इस मामले में विशेष जांच कराने की मांग की है. मरांडी ने अपने पत्र में जनसंख्या में बदलाव से लेकर जमीन पर कथित कब्जे और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल तक कई गंभीर आरोप लगाए हैं.
कई विधानसभा क्षेत्रों के वोटर आंकड़ों का दिया हवाला
बाबूलाल मरांडी ने 2019 से 2024 के बीच के मतदाता आंकड़ों को भी अपने पत्र में शामिल किया है. उन्होंने पाकुड़, बरहेट, नाला, दुमका, पोड़ैयाहाट, जामताड़ा और राजमहल समेत कई विधानसभा क्षेत्रों का जिक्र किया है. मरांडी का दावा है कि इन क्षेत्रों में एक खास समुदाय के मतदाताओं की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. उन्होंने इसे संथाल परगना में हो रहे कथित जनसांख्यिकीय बदलाव से जोड़ते हुए जांच की जरूरत बताई है.
जमीन कब्जाने और फर्जी दस्तावेजों का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया है कि कुछ इलाकों में सरकारी और गोचर जमीन के साथ आदिवासियों की जमीन पर भी अवैध कब्जे किए जा रहे हैं. उन्होंने फर्जी वंशावली तैयार करने और आधार कार्ड व जन्म प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेजों के कथित गलत इस्तेमाल का भी आरोप लगाया है. मरांडी का कहना है कि ऐसे मामलों की गहराई से जांच कर यह पता लगाया जाना चाहिए कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने में कौन-कौन लोग शामिल हैं.
राज्य सरकार पर भी साधा निशाना
मरांडी ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं. उनका आरोप है कि वोट बैंक की राजनीति के चलते कथित रूप से अवैध रूप से रह रहे लोगों को संरक्षण दिया जा रहा है. हालांकि, इन आरोपों पर राज्य सरकार या संबंधित पक्ष की प्रतिक्रिया इस जानकारी में सामने नहीं आई है.
अमित शाह से विशेष अभियान चलाने की मांग
बाबूलाल मरांडी ने केंद्रीय गृह मंत्री से संथाल परगना के सीमावर्ती जिलों में विशेष जांच अभियान चलाने की मांग की है. उन्होंने पुराने खतियान के आधार पर वंशावली की जांच कराने और मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण कराने का सुझाव दिया है. इसके साथ ही उन्होंने संथाल परगना में डिटेंशन सेंटर बनाने की मांग भी रखी है.
फर्जी दस्तावेजों की जांच की भी मांग
मरांडी ने कथित रूप से अवैध तरीके से रह रहे विदेशी नागरिकों की पहचान कर कानून के तहत कार्रवाई और निर्वासन की मांग की है. उन्होंने फर्जी दस्तावेज तैयार करने वालों के साथ इसमें मदद करने वाले सरकारी अधिकारियों की भूमिका की जांच केंद्रीय एजेंसियों से कराने की मांग भी की है. अब देखना होगा कि केंद्रीय गृह मंत्रालय इस पत्र और इसमें लगाए गए आरोपों पर क्या कार्रवाई करता है.