Nepal Flood: नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बाद हालात अब भी गंभीर बने हुए हैं। आपदा के छठे दिन भी प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान जारी है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ और इससे जुड़ी घटनाओं में मृतकों की संख्या 903 तक पहुंच गई है, जबकि करीब 4,250 लोग अब भी लापता हैं। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के इलाकों में फंसे लोगों तक पहुंचना और लापता लोगों की तलाश करना है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार अब तक 9,435 लोगों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। विभिन्न इलाकों से लगातार शव बरामद किए जा रहे हैं। पहचान और आवश्यक जांच की प्रक्रिया पूरी करने के बाद कई शवों का सामूहिक अंतिम संस्कार किया जा रहा है। बड़ी संख्या में परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे हैं।
आठ जिलों में लगातार मिल रहे शव
बाढ़ प्रभावित आठ जिलों से अब तक बड़ी संख्या में शव बरामद हुए हैं। आंकड़ों के अनुसार चितवन में 272, गोरखा में 62, नुवाकोट में 95, नवलपरासी ईस्ट में 207, नवलपरासी वेस्ट में 151, धादिंग में 55, तनहूं में 37 और रसुवा में 24 शव मिल चुके हैं।
इसी बीच मध्य नेपाल में त्रिशूली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ने से घ्यालचोक-चारौदी के बीच बना करीब 130 मीटर लंबा पुल तेज बहाव में बह गया। पुल टूटने से आसपास के करीब 400 परिवारों का मुख्य संपर्क मार्ग बाधित हो गया है।
किसानों के सामने भी बढ़ा संकट
पुल के बह जाने से स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित होने के साथ कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने में भी परेशानी खड़ी हो गई है। इसी मार्ग से दूध और सब्जियां समेत अन्य कृषि उत्पाद सहकारी संस्था तक पहुंचाए जाते थे। अब पुल टूटने से किसानों को अपनी उपज बाहर भेजने में दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है।
इससे पहले 26 अगस्त को आई बाढ़ में धवादिघाट का पुल भी बह गया था। वहीं, बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित क्षेत्रों में गाद और मलबे की बड़ी मात्रा जमा है। रसुवा में कई मकान मलबे में तब्दील हो गए हैं और राहत दल लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं।
हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में फंसे लोगों को निकालने का अभियान
रसुवा स्थित अपर त्रिशूली-1 प्रोजेक्ट में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाली सेना के साथ भारत, चीन और दक्षिण कोरिया के विशेषज्ञ भी अभियान में जुटे हैं। पिछले दो दिनों में करीब 250 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। भारतीय टीम सुरंग के करीब तीन किलोमीटर अंदर तक जाकर लोगों की तलाश कर रही है।
नुवाकोट के अपर त्रिशूली-3ए प्रोजेक्ट की सुरंग में मलबा हटाने के लिए नेपाली सेना के इंजीनियर नियंत्रित विस्फोट का इस्तेमाल कर रहे हैं। अभियान में सेना, सशस्त्र पुलिस और नेपाल पुलिस के विशेषज्ञों के साथ स्निफर डॉग्स की मदद भी ली जा रही है।
9,435 लोगों को सुरक्षित निकाला गया
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह के अनुसार, अब तक 9,435 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। इसके लिए 394 हवाई उड़ानें संचालित की गई हैं, जिनमें रविवार को 72 उड़ानें शामिल हैं। हाइड्रोपावर परियोजनाओं के आसपास फंसे 279 लोगों को सेना के हेलीकॉप्टरों के जरिए सुरक्षित निकाला गया।
रसुवा और नुवाकोट में बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए 26 अस्थायी राहत केंद्र भी संचालित किए जा रहे हैं।
भारत ने भेजी 68.5 टन राहत सामग्री
नेपाल में जारी संकट के बीच भारत की ओर से राहत सामग्री भेजने का सिलसिला जारी है। शनिवार रात भारतीय वायुसेना का C-130 विमान करीब 11 टन राहत सामग्री लेकर नेपाल पहुंचा। अब तक भारत नेपाल को कुल 68.5 टन राहत सामग्री उपलब्ध करा चुका है।
इस राहत सामग्री में दवाएं, पोर्टेबल जनरेटर, कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, हाइजीन किट, भोजन के पैकेट और पानी शुद्ध करने वाली गोलियां शामिल हैं। इसके अलावा स्टील और बेली ब्रिज निर्माण से जुड़ी सामग्री भी भेजी गई है।