Current News: नेपाल-चीन सीमा से लगे इलाकों में प्राकृतिक आपदा के बाद हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। 26 अगस्त को चीन-नेपाल सीमा स्थित ग्यिरोंग पोर्ट के पास भूस्खलन के बाद बड़ी संख्या में लोग लापता बताए जा रहे हैं। चीनी अधिकारियों के मुताबिक शनिवार शाम तक इस घटना में 16 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि 546 लोग अब भी लापता हैं।
लापता लोगों में 49 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। राहत और बचाव दल प्रभावित इलाके में लगातार तलाशी अभियान चला रहे हैं और लापता लोगों का पता लगाने की कोशिश की जा रही है।
23 देशों के 261 विदेशी नागरिक लापता, दूतावासों को दी गई जानकारी
दक्षिण-पश्चिम चीन के शिजांग स्वायत्त क्षेत्र की सरकार के अनुसार, भूस्खलन के बाद 23 देशों के कुल 261 विदेशी नागरिकों का अभी तक पता नहीं चल पाया है। इनमें नेपाल के 104, भारत के 49, लातविया के 33, अमेरिका के 18 और ब्रिटेन के 15 नागरिक शामिल हैं।
इसके अलावा कनाडा और ऑस्ट्रेलिया के 6-6, दक्षिण अफ्रीका के 4 तथा मलेशिया, जर्मनी और रूस के 3-3 नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। आयरलैंड और एस्टोनिया के 2-2 नागरिकों के अलावा फ्रांस, नीदरलैंड, न्यूजीलैंड समेत अन्य देशों के नागरिक भी लापता बताए गए हैं।
शिजांग सरकार के सूचना कार्यालय ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान लापता लोगों और राहत अभियान से जुड़ी जानकारी साझा की। चीनी अधिकारियों ने संबंधित देशों के दूतावासों और वाणिज्य दूतावासों को भी स्थिति से अवगत कराया है। प्रशासन के मुताबिक ग्यिरोंग पोर्ट और आसपास के प्रभावित इलाकों में लगातार खोज और बचाव अभियान चलाया जा रहा है।
ग्लेशियर टूटने के बाद बाढ़ ने मचाई तबाही
इस घटना से अलग नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने भी बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद भोटेकोशी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा, जिससे कई इलाकों में अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई।
बाढ़ की तेज धारा में कई गांव और घर बह गए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इस आपदा में अब तक 676 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्राकृतिक आपदा के बाद नेपाल और चीन के प्रभावित क्षेत्रों में राहत एवं बचाव कार्य जारी है। प्रशासन की प्राथमिकता लापता लोगों की तलाश और प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों तक सहायता पहुंचाना है।