Ranchi News: कांग्रेस ने रांची में एक दिन का धरना देकर दो अलग-अलग मुद्दों पर केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया. पार्टी ने अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़े चंदे के मामले में पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग की. इसके साथ ही खान एवं खनिज (विकास एवं विनियम) संशोधन अधिनियम, 2026 को लेकर राज्यों के अधिकारों का मुद्दा उठाया गया. धरना खत्म होने के बाद कांग्रेस नेताओं ने राष्ट्रपति के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन भी सौंपा.
रांची जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सोमनाथ मुंडा और रांची महानगर कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष डॉ. कुमार राजा की अगुवाई में प्रदर्शन हुआ. इसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए. कांग्रेस नेताओं ने कहा कि श्रद्धालुओं से जुड़े धन के इस्तेमाल को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब पारदर्शी तरीके से सामने आना चाहिए.
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने कहा कि आस्था से जुड़े चंदे में गड़बड़ी के आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि झारखंड के आर्थिक हितों को कमजोर करने वाली किसी भी पहल का कांग्रेस विरोध करेगी. सतीश पौल मुंजनी ने भी चंदे का स्पष्ट हिसाब जनता के सामने रखने की मांग की. उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की अनियमितता के आरोपों की स्वतंत्र जांच से ही स्थिति स्पष्ट हो सकती है.
खनिज राजस्व और राज्यों के अधिकार का सवाल
पूर्व केंद्रीय मंत्री सुबोधकांत सहाय ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों पर संबंधित राज्यों और वहां की जनता का भी हक है. उन्होंने झारखंड में खनन से जुड़ी लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का जिक्र किया. उनके मुताबिक, खनिजों से मिलने वाली आय और राज्य की वित्तीय स्वतंत्रता की सुरक्षा जरूरी है. AICC सचिव प्रणव झा ने कहा कि कांग्रेस संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ राज्यों के अधिकारों की रक्षा के लिए आवाज उठा रही है. उन्होंने झारखंड की खनिज संपदा को यहां के लोगों की धरोहर बताते हुए राजस्व में स्थानीय हितों को प्राथमिकता देने की बात कही.
MMDR कानून को लेकर कांग्रेस का विरोध
कांग्रेस विधायक दल के उपनेता राजेश कच्छप ने कहा कि MMDR संशोधन के जरिए राज्यों के अधिकार कम किए गए तो पार्टी लोकतांत्रिक तरीके से इसका विरोध करेगी. विधायक सुरेश बैठा ने कहा कि कांग्रेस का यह आंदोलन किसी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ नहीं है. उन्होंने इसे जवाबदेही, पारदर्शिता और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताया. सोमनाथ मुंडा ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा से जुड़े फैसलों में राज्य और जनता के हित सुरक्षित रहने चाहिए. डॉ. कुमार राजा ने कहा कि जनता के भरोसे से जुड़े मामलों में जवाबदेही जरूरी है. उन्होंने चंदे का विवरण सार्वजनिक करने और आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की.
कार्यक्रम को बंधु तिर्की, अजय नाथ सहदेव, राजेश सिन्हा और दयामनी बारला समेत अन्य नेताओं ने भी संबोधित किया. वक्ताओं ने केंद्र से राज्यों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान करने और झारखंड की खनिज संपदा से जुड़े हितों की रक्षा करने की मांग की. धरने में रियाज अहमद, उज्जवल प्रकाश तिवारी, सुनील सिंह, वेद प्रकाश, सुरेश सिंह, प्रिंस भट्ट, मनोज सिंह, संजीव सिंह छोटू, संजय खान, बलराम साहू, कुशल उरांव, तुलसी खरवार, मनोहर महतो, राज किशोर मुंडा, साबिर लोहार, इश्तियाक अंसारी, मांगा उरांव, अथवा उरांव, कार्तिक महतो, विजय टोप्पो, साबिर अंसारी, अजगूत महतो, संजय सेठ, अर्चना मिश्रा, रीता चौधरी और नीतू समेत कई कार्यकर्ता मौजूद रहे.