Nepal Glacier Tragedy: तिब्बत के पहाड़ों में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ ने नेपाल में भारी तबाही मचा दी है. इसके साथ कई जगह भूस्खलन भी हुआ है. इस आपदा में अब तक 160 से ज्यादा लोगों की मौत की बात सामने आई है. सैकड़ों लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं. बाढ़ और मलबे से सड़कें, पुल और मकान बुरी तरह टूट गए हैं.
भूकंप के बाद टूटा ग्लेशियर
एक अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट के मुताबिक, इलाके में आए भूकंप के बाद करीब 17,000 फीट की ऊंचाई पर ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा टूट गया. यह हिस्सा करीब 2,000 फीट चौड़ा बताया गया है. कैलगरी विश्वविद्यालय के भूवैज्ञानिकों के अध्ययन के अनुसार, हिमखंड करीब 4,000 फीट नीचे नदी की घाटी में जा गिरा. इसके बाद नदी में अचानक पानी और मलबे का तेज बहाव आया. देखते ही देखते इसने भयानक बाढ़ का रूप ले लिया.
300 से ज्यादा भारतीयों का पता नहीं
इस आपदा में कई देशों के लोग फंसे हुए हैं. मिली जानकारी के अनुसार, 300 से ज्यादा भारतीयों का अब तक पता नहीं चल पाया है. कोलकाता से कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गया 32 लोगों का दल भी लापता बताया जा रहा है. सद्गुरु के ग्रुप के करीब 80 लोग भी संपर्क से बाहर हैं. रांची के 41 वर्षीय रामप्रसाद घोष भी लापता हैं. वह काठमांडू के पास एक प्रोजेक्ट साइट पर थे. आपदा के बाद से परिवार का उनसे संपर्क नहीं हो पाया है. चीन ने भी अपने करीब 100 नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी है. हालांकि, हैदराबाद के 31 यात्रियों का एक दल समय रहते सुरक्षित जगह पहुंच गया था. इस दल में पूर्व DRDO प्रमुख डॉ. जी. सतीश रेड्डी भी शामिल थे.
भारत ने नेपाल भेजी राहत सामग्री
आपदा के बाद भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत सामग्री भेजी है. भारतीय वायुसेना के C 130J और C 17 विमान जरूरी सामान लेकर नेपाल पहुंचे हैं. इन विमानों से करीब 10 टन राहत सामग्री, खाना और जीवन रक्षक दवाएं भेजी गई हैं. नेपाल सरकार और भारतीय दूतावास ने इस मदद के लिए भारत का आभार जताया है. नेपाल सेना और राहत एजेंसियों की टीमें बचाव अभियान में जुटी हैं. अब तक 105 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित निकाले जाने की जानकारी है.
47 ग्लेशियर झीलों पर भी खतरा
वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. ICIMOD की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल और तिब्बत सीमा के पास 47 ग्लेशियर झीलें खतरनाक स्थिति में हैं. इनमें दोबारा GLOF यानी ग्लेशियर झील फटने की घटना हुई तो निचले इलाकों में भारी नुकसान हो सकता है. गांवों के साथ जलविद्युत परियोजनाओं पर भी खतरा मंडरा सकता है. फिलहाल वैज्ञानिक और राहत एजेंसियां स्थिति पर लगातार नजर रख रही हैं. मामले में राहत और बचाव अभियान जारी है. लापता लोगों की तलाश की जा रही है. प्रभावित इलाकों में नुकसान का आकलन भी किया जा रहा है.