Rankini Temple: पूर्वी सिंहभूम के जादूगोड़ा स्थित प्रसिद्ध रंकिणी मंदिर को लेकर विकास की योजना अब आगे बढ़ रही है. मंदिर परिसर को धार्मिक आस्था के साथ पर्यटन के लिहाज से भी बेहतर बनाने की तैयारी है. करीब 15 करोड़ रुपये की योजना के तहत पहाड़ी पर लगभग 800 सीढ़ियां बनाने के साथ श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए कई जरूरी सुविधाएं विकसित करने का प्रस्ताव है.
500 सीढ़ियों का काम पूरा
पहाड़ी पर प्रस्तावित करीब 800 सीढ़ियों में से लगभग 500 सीढ़ियों का निर्माण पूरा हो चुका है. अब तक मंदिर की पहाड़ी तक पहुंचने के लिए लोगों को पेड़-पौधों, चट्टानों और पत्थरों के बीच से होकर गुजरना पड़ता था. बारिश के दिनों में यह रास्ता और मुश्किल हो जाता था. फिसलन के कारण श्रद्धालुओं और पर्यटकों को पहाड़ी तक पहुंचने में परेशानी होती थी. सीढ़ियों का निर्माण पूरा होने के बाद लोगों के लिए पहाड़ी पर चढ़ना आसान होगा. इससे मंदिर आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही भी पहले की तुलना में सुगम होने की उम्मीद है.
मंदिर समिति अपने फंड से करा रही अधूरी सीढ़ियों का काम
रंकिणी मंदिर ट्रस्ट के वैद्यनाथ सिंह ने बताया कि अधूरी पड़ी सीढ़ियों का निर्माण आगे जारी रखने का फैसला मंदिर समिति ने लिया है. उन्होंने बताया कि यह काम मंदिर समिति अपने फंड से करा रही है. इससे पहाड़ी तक जाने वाले रास्ते को जल्द सुविधाजनक बनाने की उम्मीद है.
पार्क और रेस्ट रूम समेत कई सुविधाओं की योजना
सिर्फ सीढ़ियों तक ही विकास कार्य सीमित नहीं रहेगा. योजना के तहत पहाड़ी क्षेत्र में पार्क बनाने का भी प्रस्ताव है. इसके अलावा चेंजिंग रूम, रेस्ट रूम और हॉल जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है. इन व्यवस्थाओं के तैयार होने के बाद मंदिर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं और यहां आने वाले पर्यटकों को ज्यादा सुविधाएं मिल सकेंगी.
प्राकृतिक खूबसूरती भी बनेगी पर्यटन का आधार
रंकिणी मंदिर की पहाड़ी पहले से ही हरियाली और प्राकृतिक चट्टानों से घिरी हुई है. यही वजह है कि यह इलाका धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक आकर्षण का केंद्र भी बना हुआ है. अगर प्रस्तावित सुविधाएं तैयार हो जाती हैं, तो यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या बढ़ने की उम्मीद है. पर्यटन गतिविधियां बढ़ने से स्थानीय लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं. दुकान, खान-पान, वाहन, गाइड और पर्यटन से जुड़ी दूसरी गतिविधियों को इसका फायदा मिलने की संभावना है. योजना पूरी होने के बाद जादूगोड़ा का रंकिणी मंदिर धार्मिक स्थल के साथ प्राकृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में भी अपनी अलग पहचान बना सकता है.