Jharkhand Politics:झारखंड में पत्रकारों की सरकारी संस्थानों में एंट्री को लेकर विवाद अब सियासी रंग ले चुका है. नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पत्रकारों की एंट्री पर लगाई जा रही रोक को लेकर राज्य सरकार पर निशाना साधा है. मरांडी ने कहा कि रिम्स से लेकर सदर अस्पताल तक पत्रकारों की पहुंच लगातार सीमित की जा रही है.
रिम्स, प्रोजेक्ट भवन और स्टेडियम का किया जिक्र
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि सबसे पहले रिम्स में पत्रकारों की एंट्री पर रोक लगाई गई. इसके बाद प्रोजेक्ट भवन में पत्रकारों के प्रवेश पर रोक लगाए जाने की बात उन्होंने कही. उन्होंने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम को सील किए जाने का भी जिक्र किया. मरांडी ने कहा कि अब सदर अस्पताल में भी पत्रकारों की एंट्री प्रतिबंधित किए जाने की खबर सामने आई है. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब अगला नंबर थाना और दूसरे सरकारी दफ्तरों का हो सकता है.
"पत्रकार सरकार के मेहमान नहीं, लोकतंत्र के प्रहरी हैं"
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि पत्रकार सरकार के मेहमान नहीं हैं. उन्होंने पत्रकारों को लोकतंत्र का प्रहरी बताया. मरांडी ने कहा कि पत्रकारों का काम सवाल पूछना और सच्चाई सामने लाना है. उन्होंने कहा कि पत्रकारों की एंट्री रोकने से सवाल खत्म नहीं किए जा सकते. मरांडी ने कहा कि कैमरे बंद करने से सच को छिपाया नहीं जा सकता.
"सभी पत्रकारों को राज्य बदर कर दीजिए"
नेता प्रतिपक्ष ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि अगर पत्रकारों की मौजूदगी से इतनी परेशानी है तो झारखंड के छोटे-बड़े सभी पत्रकारों को राज्य से बाहर करने का आदेश ही जारी कर दिया जाए. उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि फिर न पत्रकार रहेंगे, न सवाल होंगे और न कैमरे. उनके मुताबिक, इससे सरकार की सारी परेशानी भी खत्म हो जाएगी. मरांडी के बयान के बाद सरकारी संस्थानों में पत्रकारों की एंट्री और रिपोर्टिंग को लेकर बहस तेज हो गई है.