Jharkhand: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखा है. उन्होंने परीक्षा सुधार समिति में जेएसएससी अध्यक्ष पद पर आसीन वित्त सचिव प्रशांत कुमार को शामिल किए जाने पर सवाल उठाया है. मरांडी ने अपने पत्र में कहा है कि भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद सरकार ने परीक्षा सुधार समिति बनाई है. लेकिन फरवरी 2024 से जेएसएससी के अध्यक्ष पद की जिम्मेदारी संभाल रहे प्रशांत कुमार को इसी समिति का सदस्य बनाया गया है. उनका कहना है कि सितंबर 2024 में हुई विवादित जेएसएससी सीजीएल परीक्षा भी प्रशांत कुमार के कार्यकाल में आयोजित हुई थी.
जिस कार्यकाल की जांच होनी चाहिए, उसी अधिकारी को समिति में जगह
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को बाद में रद्द करना पड़ा था. इसके अलावा जेएसएससी कार्यालय में छापेमारी हुई थी और आयोग के सचिव से पूछताछ भी की गई थी. इन घटनाओं के बाद पूरी परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हुए थे. मरांडी का कहना है कि ऐसे अधिकारी, जिनके कार्यकाल और प्रशासनिक भूमिका की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, उन्हें ही परीक्षा व्यवस्था सुधारने वाली समिति में शामिल करना हितों के टकराव का मामला है.
प्रशांत कुमार के प्रशासनिक कार्यों पर भी उठाए सवाल
पत्र में बाबूलाल मरांडी ने प्रशांत कुमार की प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं. उन्होंने कहा कि वित्त सचिव के पद पर रहते हुए राज्य के खातों में हजारों करोड़ रुपये के अंतर का मामला सामने आया था. इस मामले में विभाग की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया. मरांडी ने जल संसाधन विभाग से जुड़े एक मामले का भी उल्लेख किया है. उन्होंने कहा कि इस मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अदालत को गुमराह करने और आदेश का पालन नहीं करने पर प्रशांत कुमार पर जुर्माना लगाया था. इन सभी बातों का हवाला देते हुए मरांडी ने परीक्षा सुधार समिति में उनकी मौजूदगी पर सरकार की मंशा को संदेहास्पद बताया है.
बाबूलाल मरांडी ने CM से की ये मांग
बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से मांग की है कि जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों को देखते हुए प्रभारी अध्यक्ष प्रशांत कुमार और जेएसएससी सचिव सुधीर गुप्ता को तत्काल उनके पद से हटाया जाए. उन्होंने दोनों की गिरफ्तारी के साथ उनके कार्यकाल की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की भी मांग की है.
उन्होंने कहा कि प्रशांत कुमार को परीक्षा सुधार समिति से तुरंत हटाया जाना चाहिए. साथ ही जेएसएससी-सीजीएल से जुड़ी एजेंसी के चयन, प्रश्नपत्र की सुरक्षा, परीक्षा संचालन, परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया और सभी प्रशासनिक अनुमोदनों में उनकी भूमिका की जांच कराई जाए.
मरांडी ने यह भी मांग की है कि परीक्षा सुधार समिति में निष्पक्ष न्यायिक, तकनीकी और शैक्षणिक विशेषज्ञों के साथ छात्र प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए, ताकि समिति की कार्यप्रणाली पर किसी तरह का सवाल न उठे.
इसके अलावा उन्होंने जेपीएससी और जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में सामने आई अनियमितताओं की जांच सीबीआई को सौंपने की मांग की है. उनका कहना है कि इससे छात्रों का भरोसा दोबारा कायम किया जा सकेगा.