Bengal Politics: लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने TMC के 20 बागी सांसदों को कारण बताओ नोटिस भेजा है. इन सांसदों को अपना पक्ष रखने के लिए 7 दिन का समय दिया गया है. मामला TMC की ओर से दायर अयोग्यता याचिकाओं से जुड़ा है. पार्टी का आरोप है कि इन सांसदों ने TMC छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया का दामन थाम लिया है.
अभिषेक बनर्जी पहुंचे सुप्रीम कोर्ट
मामले को लेकर TMC सांसद अभिषेक बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उन्होंने कहा था कि लोकसभा अध्यक्ष के पास अयोग्यता याचिकाएं लंबे समय से लंबित हैं. बनर्जी ने अदालत से मामले में समय सीमा तय करने की मांग की थी. उनका कहना था कि स्पीकर को अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला लेना चाहिए.
सुप्रीम कोर्ट ने भी मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई की. पीठ में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे. अदालत ने 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा है. सुनवाई के दौरान दलबदल से जुड़े मामलों को तय समय में पूरा करने की जरूरत पर भी जोर दिया गया.
स्पीकर की कार्रवाई की जानकारी दी गई
सुप्रीम कोर्ट में लोकसभा अध्यक्ष और संसद सचिवालय की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने अदालत को बताया कि मामले में स्पीकर की ओर से कार्रवाई शुरू हो चुकी है. TMC की याचिका पर संज्ञान लेते हुए सभी संबंधित सांसदों को नोटिस भेजा गया है. उन्हें 7 दिनों के अंदर अपना जवाब देना होगा.
दलबदल कानून के तहत सदस्यता रद्द करने की मांग
TMC ने संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत इन सांसदों की सदस्यता रद्द करने की मांग की है. पार्टी का कहना है कि दूसरी पार्टी में शामिल होने के कारण इन सांसदों के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई होनी चाहिए. याचिका में लोकसभा अध्यक्ष और महासचिव के साथ 20 सांसदों को भी पक्षकार बनाया गया है.
सांसदों के नाम भी सूची में शामिल
TMC की अयोग्यता याचिका में सुदीप बंदोपाध्याय, काकोली घोष दस्तीदार और शताब्दी रॉय के नाम शामिल हैं. पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, प्रसून बनर्जी और पार्थ भौमिक भी इस सूची में हैं. अरूप चक्रवर्ती, अधिकारी दीपक देव और सायोनी घोष के नाम भी शामिल हैं. इसके अलावा जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया, बापी हलदर, मोहम्मद अबू ताहिर खान और कालीपदो सोरेन खेरवाल के नाम हैं. असित कुमार मल, जून मालिया, मिताली बाग, खलीदुर रहमान, माला रॉय और शर्मिला सरकार भी सूची में शामिल हैं.
अब 7 दिन के जवाब पर नजर
फिलहाल मामला लोकसभा और सुप्रीम कोर्ट दोनों स्तर पर चल रहा है. अब नजर इस बात पर है कि 20 सांसद नोटिस का क्या जवाब देते हैं. दलबदल कानून के तहत आगे क्या कार्रवाई होगी, यह उनके जवाब और संबंधित प्रक्रिया पर निर्भर करेगा. मामले में आगे की कार्रवाई से पश्चिम बंगाल की राजनीति पर भी असर पड़ने की संभावना है.