Deoghar News: झारखंड सरकार ने देवघर जिले की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को सुचारू रखने के लिए आउटसोर्सिंग व्यवस्था पर 15 करोड़ रुपये खर्च करने की मंजूरी दी है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए जारी इस राशि से अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक सेवाओं के लिए कर्मियों की व्यवस्था की जाएगी। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जरूरत से अधिक आउटसोर्सिंग कर्मचारी रखने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी हो सकती है।
यह राशि सरकारी अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों, प्रयोगशालाओं, कार्यालयों और डायग्नोस्टिक सेंटरों में आवश्यक आउटसोर्सिंग सेवाएं लेने के लिए इस्तेमाल की जाएगी। हालांकि मेडिकल कॉलेज को इस फंड के दायरे से अलग रखा गया है।
स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह ने 20 अगस्त को इस संबंध में आदेश जारी किया। राशि का भुगतान देवघर कोषागार के माध्यम से किया जाएगा। देवघर के सिविल सर्जन-सह-मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी शिव प्रसाद मिश्रा को राशि की निकासी और खर्च की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बायोमेट्रिक हाजिरी की जांच के बाद होगा भुगतान
सरकार ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के भुगतान के लिए बायोमेट्रिक उपस्थिति को अनिवार्य किया है। संबंधित अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को कर्मचारियों की उपस्थिति के साथ उनके कार्य की भी जांच करनी होगी।
सत्यापन के बाद ही भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। कोषागार भी बिना प्रमाणन के बिल का भुगतान नहीं करेगा। इसके लिए सिविल सर्जन को यह प्रमाणित करना होगा कि संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति और कार्य का सत्यापन किया जा चुका है।
जरूरत के अनुसार ही रखे जाएंगे कर्मचारी
आउटसोर्सिंग के जरिए कर्मचारियों की संख्या तय करने के लिए मरीजों की संख्या और संस्थान में पहले से कार्यरत नियमित एवं संविदा कर्मियों की उपलब्धता को आधार बनाया जाएगा। मौजूदा कर्मचारियों की संख्या को ध्यान में रखते हुए ही खाली पदों पर आउटसोर्सिंग सेवा ली जा सकेगी। सरकार ने चेतावनी दी है कि बिना जरूरत अतिरिक्त आउटसोर्सिंग कर्मचारी रखने की पुष्टि होने पर संबंधित संस्थान के प्रभारी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हर महीने स्वास्थ्य विभाग को देना होगा खर्च का ब्योरा
15 करोड़ रुपये की राशि के उपयोग पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी रहेगी। संबंधित अधिकारियों को प्रत्येक महीने की 10 तारीख तक खर्च का विवरण विभाग को भेजना होगा।
इसके अलावा हर तीन महीने में खर्च का सत्यापन महालेखाकार, झारखंड के साथ कराया जाएगा। सरकार का उद्देश्य फंड का सही उपयोग सुनिश्चित करने के साथ कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति और स्वास्थ्य संस्थानों की जरूरत के अनुसार ही आउटसोर्सिंग सेवाएं लेना है।