Ranchi News: झारखंड की शिक्षा व्यवस्था को लेकर SFI ने राज्य सरकार पर सवाल उठाए हैं. SFI की संयुक्त सचिव ऐशी घोष ने सोमवार को रांची के सत्य भारती में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. उन्होंने कहा कि छात्रों की परेशानी सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है. छात्रों की कई समस्याएं अभी भी बनी हुई हैं.
1 अक्टूबर से शुरू होगा "स्कूल बचाओ" अभियान
ऐशी घोष ने बताया कि SFI 1 अक्टूबर से पूरे देश के साथ झारखंड में भी "स्कूल बचाओ" अभियान शुरू करेगा. इस अभियान के दौरान SFI की टीमें अलग-अलग जिलों के स्कूलों में जाएंगी. टीम स्कूलों की वास्तविक स्थिति देखेगी. छात्रों और शिक्षकों से बातचीत की जाएगी. स्कूलों में मौजूद समस्याओं का सर्वे भी किया जाएगा. इसके बाद तैयार रिपोर्ट सरकार को सौंपी जाएगी.
चार साल की पढ़ाई पांच साल में पूरी होने का आरोप
SFI ने उच्च शिक्षा में सत्र देर से चलने का मुद्दा भी उठाया. ऐशी घोष ने कहा कि कई छात्रों की चार साल की अंडरग्रेजुएट पढ़ाई पांच साल तक खिंच रही है. इसका सीधा असर छात्रों के भविष्य पर पड़ रहा है. समय पर पढ़ाई पूरी नहीं होने से नौकरी के लिए आवेदन करने में परेशानी होती है. आगे की पढ़ाई में भी छात्रों को दिक्कत का सामना करना पड़ता है.
स्कॉलरशिप में देरी पर भी सवाल
SFI ने छात्रों को समय पर स्कॉलरशिप नहीं मिलने का आरोप लगाया. संगठन के मुताबिक, आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों के लिए स्कॉलरशिप काफी महत्वपूर्ण है. पैसे समय पर नहीं मिलने से कई छात्रों के सामने पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो जाता है. छात्राओं और आदिवासी छात्रों के लिए हॉस्टल की कमी SFI ने हॉस्टल की कमी को लेकर भी सरकार को घेरा.
संगठन का कहना है कि दूर-दराज के इलाकों से आने वाले छात्रों को कॉलेज में दाखिला तो मिल जाता है, लेकिन रहने की पर्याप्त सुविधा नहीं मिलती. इस समस्या का सबसे ज्यादा असर छात्राओं और आदिवासी छात्रों पर पड़ने का दावा किया गया.
परीक्षा कराने वाली एजेंसियों पर उठाए सवाल
परीक्षा व्यवस्था को लेकर भी SFI ने सवाल खड़े किए. ऐशी घोष ने थर्ड-पार्टी एजेंसियों को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी देने पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि कुछ एजेंसियों पर पहले भी परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप लग चुके हैं. ऐसे में उन्हीं एजेंसियों को दोबारा परीक्षा की जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है, इस पर सरकार को जवाब देना चाहिए.
छात्रों पर पुलिस कार्रवाई का भी विरोध
SFI ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस कार्रवाई का विरोध किया. संगठन का कहना है कि छात्रों को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार है. ऐशी घोष ने सरकार से छात्रों की समस्याओं पर बातचीत करने और उनका समाधान निकालने की मांग की. SFI ने साफ किया कि छात्रों की लड़ाई सिर्फ किसी एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है. संगठन अब स्कूलों और कॉलेजों की जमीनी स्थिति को सामने लाने के लिए अभियान चलाने की तैयारी में है.