Jharkhand High Court: झारखंड हाईकोर्ट ने 105 पूर्व पुलिसकर्मियों को बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने ट्रेनिंग के नाम पर उनके वेतन और दूसरी देय राशि से काटी गई रकम वापस करने का आदेश दिया है. मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत में हुई.
कोर्ट ने आईआरबी के समादेष्टा की ओर से जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें पुलिस विभाग से इस्तीफा देने वाले पूर्व कर्मियों से ट्रेनिंग का खर्च वसूला गया था. हर पूर्व पुलिसकर्मी से करीब 3 लाख रुपये की कटौती की गई थी.
तीन साल की शर्त को लेकर था विवाद
पुलिस विभाग की ओर से कहा गया था कि पीएम फॉर्म 106 के नियम के तहत ट्रेनिंग पूरी करने के तीन साल के अंदर नौकरी छोड़ने पर ट्रेनिंग का खर्च कर्मचारी से लिया जा सकता है. वहीं, पूर्व पुलिसकर्मियों की ओर से अधिवक्ता दिवाकर उपाध्याय ने इसका विरोध किया. उन्होंने कोर्ट को बताया कि झारखंड पुलिस मैनुअल के नियम 665 के अनुसार तीन साल की अवधि नियुक्ति की तारीख से गिनी जानी चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि इन कर्मियों से पीएम फॉर्म 106 पर हस्ताक्षर ही नहीं कराए गए थे.
कोर्ट ने 12 सप्ताह में पैसा लौटाने को कहा
दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 105 पूर्व पुलिसकर्मियों की याचिका स्वीकार कर ली. कोर्ट ने ट्रेनिंग के नाम पर काटी गई पूरी रकम 12 सप्ताह के भीतर वापस करने का निर्देश दिया है. अगर विभाग तय समय में पैसा वापस नहीं करता है, तो उसे 6 फीसदी साधारण ब्याज भी देना होगा.
2019 में हुई थी पुलिस विभाग में नियुक्ति
इन सभी कर्मियों की वर्ष 2019 में आईआरबी की अलग-अलग बटालियन में नियुक्ति हुई थी. नियुक्ति के बाद उन्हें हजारीबाग के पद्मा में ट्रेनिंग के लिए भेजा गया था. ट्रेनिंग छह महीने में पूरी होनी थी. हालांकि, उनकी ट्रेनिंग वर्ष 2021 में पूरी हुई. इसके बाद वर्ष 2023 में इनमें से कई कर्मियों का चयन पंचायत सचिव, शिक्षक समेत राज्य सरकार के दूसरे पदों पर हो गया. नई नौकरी मिलने के बाद उन्होंने पुलिस विभाग से इस्तीफा दे दिया. इस्तीफे के बाद विभाग ने उनकी ट्रेनिंग पर खर्च हुई रकम की कटौती शुरू कर दी थी. अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद इन 105 पूर्व पुलिसकर्मियों को काटी गई रकम वापस मिलने का रास्ता साफ हो गया है.