Current News: राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह ने भारत की बढ़ती आर्थिक और सामरिक ताकत के बीच बाहरी ताकतों की भूमिका को लेकर चिंता जताई है। समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में उन्होंने कहा कि भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी से एक मजबूत आर्थिक शक्ति के रूप में उभर रहा है। देश की बढ़ती रक्षा उत्पादन क्षमता से विदेशी हथियार लॉबी की चिंताएं बढ़ सकती हैं।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ा रहा भारत
हरिवंश ने चीन की बढ़ती समुद्री गतिविधियों का जिक्र करते हुए कहा कि चीन कई डीप-वॉटर पोर्ट विकसित कर रहा है। उनके अनुसार, श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल के जरिए भारत को घेरने की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली में सामने आए कुछ नारों का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे घटनाक्रमों को बाहरी ताकतों के संभावित प्रभाव के नजरिए से भी देखा जाना चाहिए।
हरिवंश ने कहा कि भारत अपनी रक्षा जरूरतों में आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर लगातार जोर दे रहा है। देश में फाइटर जेट, मिसाइल, युद्धपोत और अन्य सैन्य उपकरणों के उत्पादन की क्षमता विकसित की जा रही है। उन्होंने कहा कि रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता बढ़ने से भारत की रणनीतिक क्षमता मजबूत होगी और विदेशी निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
संसद के गतिरोध पर भी रखी राय, पांच साल के जनादेश का सम्मान जरूरी
संसद के कामकाज को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच जारी गतिरोध पर हरिवंश ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के उस संदेश का उल्लेख किया, जिसमें राजनीतिक मतभेदों के बावजूद देश की बड़ी चुनौतियों से निपटने के लिए मिलकर काम करने की बात कही गई थी। उन्होंने कहा कि सरकार का विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। चुनाव में सरकार को हराना विपक्ष की राजनीतिक जिम्मेदारी हो सकती है, लेकिन संसद को सुचारू रूप से चलने देना भी जरूरी है।
राज्यसभा के उपसभापति ने कहा कि जनता ने सरकार को पांच साल के लिए जनादेश दिया है और उसे अपना काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की अपनी जिम्मेदारियां हैं। हरिवंश के मुताबिक, राजनीतिक मतभेदों के बावजूद संसद में सार्थक चर्चा और देश से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों पर मिलकर काम करने की भावना बनी रहनी चाहिए।