Current News: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के राष्ट्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे ने पंजाब के पठानकोट में एक कार्यक्रम के दौरान जंतर-मंतर पर हुए एक प्रदर्शन को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हुए थे और इसे असली Gen-Z आंदोलन बताना सही नहीं है।
परांडे ने कहा कि पुलिस के AI कैमरा विश्लेषण के अनुसार प्रदर्शन में 2,900 से अधिक आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शामिल हुए थे। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है।
प्रदर्शन में आपत्तिजनक पोस्टर और नारों का लगाया आरोप
VHP नेता ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान आपत्तिजनक पोस्टर लगाए गए और विवादित नारे लगाए गए। उन्होंने यह भी दावा किया कि हिंदू संतों की वेशभूषा और धार्मिक भावनाओं का अपमान किया गया।
उन्होंने कहा कि ऐसे प्रदर्शनों के जरिए समाज में भ्रम पैदा करने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। परांडे ने दावा किया कि प्रदर्शन में वास्तविक Gen-Z युवाओं की भागीदारी नहीं थी, बल्कि कुछ लोगों ने युवाओं के नाम पर आंदोलन का इस्तेमाल किया।
पंजाब में धर्मांतरण को लेकर भी उठाए सवाल
मिलिंद परांडे ने पंजाब में कथित धर्मांतरण को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य के सीमावर्ती इलाकों में विदेशी फंडिंग के जरिए गरीब और पिछड़े वर्ग के सिख परिवारों को धर्मांतरण के लिए निशाना बनाया जा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि चमत्कारी इलाज और आर्थिक मदद का लालच देकर कुछ ईसाई मिशनरियों की ओर से गरीब परिवारों को प्रभावित किया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों के समर्थन में उन्होंने कोई सार्वजनिक प्रमाण पेश नहीं किया।
पंजाब में सख्त एंटी-कन्वर्जन कानून की मांग
VHP नेता ने केंद्र और पंजाब सरकार से राज्य में सख्त धर्मांतरण विरोधी कानून लागू करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जबरन, धोखे या लालच के जरिए होने वाले धर्मांतरण पर प्रभावी रोक लगाई जानी चाहिए।
परांडे ने कहा कि विश्व हिंदू परिषद युवाओं और आम लोगों को कथित टूलकिट आंदोलनों और अवैध धर्मांतरण के प्रति जागरूक करने के लिए देशभर में सांस्कृतिक और धार्मिक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेगी।उन्होंने कहा कि समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ सरकार को भी ऐसे मामलों में कानून के तहत निष्पक्ष और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करनी चाहिए।