Ranchi News : जमशेदपुर के अवध डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने 68 छात्रों के बीडीएस में दाखिले के मामले में राज्य सरकार की ओर से कॉलेज का एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट (EC) रद्द करने के आदेश को गलत ठहराते हुए निरस्त कर दिया। अदालत ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज के यूजी और पीजी पाठ्यक्रमों में दाखिले पर नेशनल डेंटल कमीशन (NDC) की रोक को भी गलत माना है।
EC रद्द करने का पर्याप्त आधार नहीं मिला
कोर्ट ने कहा कि एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट केवल सीमित परिस्थितियों में ही वापस लिया जा सकता है। इसमें प्रमाणपत्र धोखाधड़ी से हासिल किया गया हो, प्रमाणपत्र जारी करने का आधार समाप्त हो गया हो या कोई अन्य गंभीर और समान प्रकृति का कारण मौजूद हो। मौजूदा मामले में ऐसा कोई आधार नहीं मिला। इसलिए 19 जनवरी 2018 के EC को रद्द करने का राज्य सरकार का आदेश टिकाऊ नहीं है।
68 छात्रों के दाखिले की वैधता पर फैसला नहीं
हालांकि कोर्ट ने 68 छात्रों के दाखिले को वैध या अवैध घोषित नहीं किया है। अदालत ने इस मुद्दे को नेशनल डेंटल कमीशन की स्वतंत्र जांच के लिए छोड़ दिया है। कॉलेज की ओर से अधिवक्ता सुमित गड़ोदिया और अधिवक्ता कुमार वैभव ने पक्ष रखा।
मामला शैक्षणिक सत्र 2025-26 में बीडीएस की 68 सीटों पर दाखिले से जुड़ा है। कॉलेज के मुताबिक JCECEB ने स्ट्रे वैकेंसी राउंड की काउंसलिंग 14 नवंबर 2025 को रोक दी थी, जबकि नेशनल डेंटल कमीशन के अनुसार दाखिले की अंतिम तारीख 20 नवंबर 2025 थी। इसी आधार पर कॉलेज ने 20 नवंबर को ऑल इंडिया मेरिट लिस्ट के आधार पर 68 छात्रों का दाखिला लिया।
बाद में JCECEB ने 27 नवंबर से काउंसलिंग दोबारा शुरू की। स्ट्रे वैकेंसी राउंड के बाद कॉलेज में एक छात्र के दाखिले की अनुशंसा की गई। कॉलेज का कहना था कि तब तक सभी सीटें भर चुकी थीं। इसके बाद राज्य सरकार ने कॉलेज को शो-कॉज नोटिस जारी किया।
सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले पर रोक भी गलत
राज्य सरकार की सूचना के आधार पर नेशनल डेंटल कमीशन ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 में कॉलेज के बीडीएस, एमडीएस समेत सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले पर रोक लगा दी थी। कोर्ट ने इस कार्रवाई को भी उचित नहीं माना।
अदालत ने कहा कि राज्य सरकार ने केवल 19 जनवरी 2018 के एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट को रद्द किया था, जबकि कॉलेज के अन्य तीन एसेंशियलिटी सर्टिफिकेट प्रभावी थे। ऐसे में सभी पाठ्यक्रमों में दाखिले पर रोक लगाना उचित नहीं था।
कोर्ट ने यह भी कहा कि नेशनल डेंटल कमीशन ने इस मामले में स्वतंत्र जांच नहीं की और केवल राज्य सरकार की सूचना के आधार पर कार्रवाई की। वहीं, अदालत ने माना कि कॉलेज का संचालन जारी है और राज्य सरकार ने बाद में एक छात्र के दाखिले की अनुशंसा भी की थी। इससे यह स्पष्ट होता है कि कॉलेज की स्थापना की आवश्यकता समाप्त नहीं हुई है।