Ranchi News : 12 अगस्त। मधुकम क्षेत्र में अतिक्रमण हटाने के मामले में महादेव उरांव को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली। झारखंड हाई कोर्ट के 31 जुलाई 2026 के आदेश के खिलाफ दाखिल उनकी स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महादेव उरांव की ओर से दाखिल याचिका पर कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि पहले पीड़ितों से पैसा लेकर जमीन बेची गई और बाद में कोर्ट से कब्जा दिलाने की मांग की गई। कोर्ट ने इसे जालसाजी का मामला बताया और कहा कि यदि मामले को आगे बढ़ाया गया तो महादेव उरांव पर जालसाजी को लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका वापस लेने का आग्रह भी नहीं माना
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद महादेव उरांव की ओर से याचिका वापस लेने का आग्रह किया गया। हालांकि, कोर्ट ने इस आग्रह को स्वीकार नहीं किया और SLP खारिज कर दी।
दरअसल, 31 जुलाई 2026 को झारखंड हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति राजेश शंकर की अदालत ने महादेव उरांव की अवमानना याचिका पर फैसला सुनाया था। हाई कोर्ट ने रिट याचिका में उनके पक्ष में दिए गए एकल पीठ के आदेश को वापस ले लिया था। एकल पीठ ने अंचल अधिकारी (CO) को अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि महादेव उरांव ने रिट याचिका में प्रतिवादियों की ओर से दी गई एक करोड़ रुपये की राशि की जानकारी छिपाई थी। साथ ही जिन लोगों से यह राशि जुड़ी थी, उन्हें याचिका में प्रतिवादी नहीं बनाया गया था।
हाई कोर्ट ने महादेव उरांव पर कुल 12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था। उन्हें 12 प्रतिवादियों को एक-एक लाख रुपये देने का निर्देश दिया गया था।
12 घरों को हटाने के आदेश के बाद शुरू हुई थी कार्रवाई
हाई कोर्ट ने कहा था कि प्रार्थी ने शपथ पत्र में गलत तथ्य प्रस्तुत किए और अदालत को गुमराह किया। हस्तक्षेपकर्ताओं के साथ हुए पैसे के लेनदेन की जानकारी भी छिपाई गई थी। मामले में हस्तक्षेपकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता सचिन कुमार और अधिवक्ता गौरव राज ने पक्ष रखा था।
पूरा मामला खादगड़ा शिव दुर्गा मंदिर रोड स्थित मुंडारी प्रकृति की जमीन से जुड़ा है। जिला प्रशासन ने इस जमीन पर बने 12 घरों को हटाने का आदेश दिया था। इसके बाद बुलडोजर से कार्रवाई शुरू की गई थी, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया था।
स्थानीय लोगों का कहना था कि उन्होंने प्रति कट्ठा 5.25 लाख रुपये की दर से जमीन खरीदी है और कई वर्षों से वहां घर बनाकर रह रहे हैं। उनके अनुसार 38.25 डिसमिल जमीन के लिए कुल करीब 1 करोड़ 8 लाख 93 हजार 750 रुपये का भुगतान किया गया था। इसके बावजूद अब उन्हें वहां से हटाया जा रहा है।