PMAY Gramin Jharkhand: झारखंड में प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन और वित्तीय प्रबंधन को लेकर CAG की रिपोर्ट में कई कमियां सामने आई हैं. रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल की अवधि में योजना के लिए 20,199.98 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए, लेकिन राज्य सरकार 14,113.07 करोड़ रुपये ही खर्च कर सकी. यानी उपलब्ध राशि का करीब 70 फीसदी ही इस्तेमाल हुआ.
CAG ने योजना में लाभुकों के चयन से लेकर राशि के इस्तेमाल और आवास निर्माण की समयसीमा तक कई स्तरों पर खामियां दर्ज की हैं.
लाभुकों की सूची में देरी से 6.32 लाख परिवार योजना से बाहर
CAG के अनुसार, योजना के लाभुकों की सूची तैयार करने में काफी समय लगा. इस देरी के कारण 6.32 लाख पात्र परिवार योजना का लाभ पाने से बाहर रह गए. वहीं, करीब 2.90 लाख ऐसे लोगों के नाम भी सूची में शामिल कर दिए गए थे, जो योजना के निर्धारित मानकों के अनुसार पात्र नहीं थे. बाद में ग्राम सभा की प्रक्रिया के जरिए इन नामों को सूची से हटाया गया.
छह जिलों में 60 पंचायतों की जांच
योजना की स्थिति का आकलन करने के लिए CAG ने राज्य के छह जिलों में नमूना जांच की. इसमें बोकारो, दुमका, गिरिडीह, पलामू, रामगढ़ और सिमडेगा शामिल थे. इन जिलों के 12 प्रखंडों की 60 ग्राम पंचायतों में योजना से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड की जांच की गई.
22.34 लाख पात्र परिवारों की सूची, लेकिन आवंटन हुआ कम
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, 2016 से नवंबर 2022 के बीच झारखंड में 22.34 लाख योग्य परिवारों की पहचान कर सूची तैयार की गई. हालांकि इस सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देरी हुई और इसमें कई खामियां भी पाई गईं. इसके बाद केंद्र की ओर से 22.34 लाख परिवारों के मुकाबले सिर्फ 16.02 लाख आवासों का आवंटन किया गया. इसका सीधा असर 6.32 लाख परिवारों पर पड़ा, जो योजना के दायरे से बाहर रह गए.
15.62 लाख आवास पूरे, लेकिन कई घरों में लगी तीन साल तक की अवधि
राज्य में केंद्र से आवंटित 16.02 लाख आवासों में से 2016 से 2024 के बीच 15.92 लाख को मंजूरी दी गई. जनवरी 2025 तक इनमें 15.62 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका था. इस हिसाब से निर्माण की उपलब्धि करीब 98 फीसदी रही. हालांकि, CAG ने यह भी पाया कि कई घर निर्धारित एक साल की समयसीमा में पूरे नहीं हुए. कुछ मामलों में आवास निर्माण पूरा होने में तीन साल तक का समय लगा.
SNA में राशि ट्रांसफर करने में देरी, 22.39 करोड़ रुपये की ब्याज देनदारी
रिपोर्ट में योजना की वित्तीय व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. 2019 से 2024 के बीच केंद्र सरकार के हिस्से की राशि SNA में ट्रांसफर करने में राज्य की ओर से देरी हुई.
CAG के मुताबिक, कुछ मामलों में यह देरी 92 दिनों तक रही. इसके चलते राज्य सरकार पर ब्याज के रूप में 22.39 करोड़ रुपये की देनदारी बन गई. रिपोर्ट में योजना की राशि के इस्तेमाल, लाभुकों के चयन, आवास निर्माण की समयसीमा और वित्तीय प्रबंधन से जुड़ी इन कमियों को दर्ज किया गया है.