Ranchi News : झारखंड में मनरेगा के क्रियान्वयन को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई गंभीर खामियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 से 2024 के बीच राज्य में अकुशल मजदूरों की 321.84 करोड़ रुपये की मजदूरी का भुगतान नहीं किया गया था। मार्च 2025 तक यह राशि मजदूरों को नहीं मिल सकी थी।
1.02 करोड़ योजनाओं में करीब आधी अधूरी
CAG की रिपोर्ट के मुताबिक, इस अवधि में मनरेगा के तहत करीब 1.02 करोड़ योजनाएं दर्ज की गईं। इनमें सिर्फ 27.96 लाख योजनाएं पूरी हो सकीं, जबकि करीब 49 फीसदी योजनाएं अधूरी रह गईं। वहीं लगभग 24 फीसदी योजनाएं शुरू ही नहीं की गईं। मार्च 2024 तक मनरेगा की योजनाओं पर करीब 2,633 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे। CAG की जांच में मनरेगा की राशि के इस्तेमाल को लेकर भी गंभीर अनियमितता सामने आई। गिरिडीह, गुमला और पाकुड़ में मजदूरी मद की राशि से करीब 32.62 लाख रुपये पुरानी सरकारी गाड़ियों के टायर, बैट्री और अन्य सामान बदलने में खर्च किए गए।
नियमों के अनुसार मनरेगा की मजदूरी मद की राशि का इस्तेमाल इस तरह के दूसरे कार्यों के लिए नहीं किया जा सकता है।
सिर्फ 2 से 4 फीसदी परिवारों को मिला 100 दिन का काम
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि झारखंड में सिर्फ 2 से 4 फीसदी परिवार ही मनरेगा के तहत साल में 100 दिन का रोजगार पूरा कर सके। CAG द्वारा जांच के लिए चुने गए छह जिलों में यह आंकड़ा और कम रहा और वहां सिर्फ 1 से 2 फीसदी परिवार ही 100 दिन का काम पूरा कर पाए।
छह जिलों की 480 योजनाओं की हुई जांच
CAG ने पूर्वी सिंहभूम, गढ़वा, गिरिडीह, गोड्डा, गुमला और पाकुड़ में मनरेगा के कामकाज की जांच की। इसके लिए छह जिलों के 12 प्रखंड, 48 पंचायत और 480 योजनाओं को जांच के दायरे में शामिल किया गया था। रिपोर्ट में मजदूरी भुगतान में देरी, योजनाओं के अधूरे रहने और मनरेगा की राशि के निर्धारित उद्देश्य से अलग इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए गए हैं।