Ranchi News : झारखंड विधानसभा में प्रथम अनुपूरक बजट पर चर्चा के दौरान JLKM विधायक जयराम महतो ने छात्रों और युवाओं से जुड़े कई मुद्दे सदन में उठाए। उन्होंने 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द किए जाने के बाद अब JSSC CGL परीक्षा में कथित गड़बड़ी की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की।
जयराम महतो ने कहा कि सरकार और छात्रों के बीच बातचीत के बाद 14वीं JPSC PT परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया गया है, लेकिन छात्रों की कई अन्य मांगें अभी लंबित हैं। उन्होंने विशेष रूप से CGL परीक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
महतो ने सदन में दावा किया कि JPSC PT मामले में आरोपी बताए जा रहे अभय तिवारी का चयन CGL परीक्षा के माध्यम से हुआ था। उन्होंने आरोप लगाया कि अभय तिवारी के करीब एक दर्जन रिश्तेदारों का चयन भी इसी परीक्षा के जरिए हुआ। महतो ने यह भी दावा किया कि आरोपी ने करीब 400 अभ्यर्थियों का चयन कराने की बात स्वीकार की है।
CBI जांच के साथ CGL रद्द करने की मांग, पुरानी JPSC परीक्षाओं का मामला भी उठाया
जयराम महतो ने इन आरोपों की उच्चस्तरीय CBI जांच कराने की मांग की। साथ ही उन्होंने CGL परीक्षा को रद्द करने की मांग भी सदन में रखी। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसी मामले में ED जांच के लिए अदालत का रुख कर सकती है, तो CGL परीक्षा को रद्द करने के मामले को भी अदालत के समक्ष रखा जा सकता है। उनके अनुसार, परीक्षा से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही अभ्यर्थियों के बीच भरोसा कायम किया जा सकता है।
जयराम महतो ने JPSC की पहली और दूसरी परीक्षा से जुड़े पुराने मामले का भी मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि इस मामले में CBI ने वर्ष 2024 में राज्य सरकार से अभियोजन की अनुमति मांगी थी, लेकिन अब तक इस दिशा में आगे की कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से पुराने मामलों में भी कार्रवाई तेज करने की मांग की, ताकि परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों का निष्पक्ष तरीके से निपटारा हो सके।
छात्रों पर लाठीचार्ज की निष्पक्ष जांच की मांग
विधानसभा में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज का मुद्दा भी जयराम महतो ने जोरदार तरीके से उठाया। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। महतो ने कहा कि जांच के दौरान जो भी अधिकारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन में सरकार को संवेदनशीलता के साथ काम करना चाहिए और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए।