Dhar Bhojshala : मध्य प्रदेश के धार स्थित ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र भोजशाला से जुड़ी 11वीं शताब्दी की प्रसिद्ध “मां वाग्देवी” (सरस्वती) की प्रतिमा को भारत वापस लाने की कवायद काफी तेज हो गई है. सफेद संगमरमर की यह दुर्लभ और अनमोल मूर्ति लगभग एक सदी पहले औपनिवेशिक काल के दौरान ब्रिटेन ले जाई गई थी. केंद्र सरकार अब इस प्राचीन पुरातात्विक धरोहर की स्वदेश वापसी को लेकर ब्रिटेन के संग्रहालय प्रशासन के साथ कूटनीतिक स्तर पर लगातार बातचीत कर रही है.
हाई कोर्ट के निर्देश और राज्य सरकार के आग्रह पर शुरू हुई प्रक्रिया
मध्य प्रदेश सरकार के औपचारिक निवेदन और उच्च न्यायालय की तरफ से आए स्पष्ट निर्देशों के बाद इस पूरी प्रक्रिया ने जोर पकड़ा है. प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, यदि यह ऐतिहासिक धरोहर वापस आती है तो यह भारत के सांस्कृतिक पुनर्जागरण अभियानों के लिए एक और बड़ी सफलता होगी. उल्लेखनीय है कि साल 2014 के बाद से अब तक दुनिया के अलग-अलग देशों से 650 से अधिक प्राचीन मूर्तियाँ और ऐतिहासिक धरोहरें सफलतापूर्वक भारत वापस लाई जा चुकी हैं.
दशकों पुरानी मांग और जनता की आस्था का केंद्र
धार की ऐतिहासिक भोजशाला भारतीय संस्कृति, साहित्य और पुरातात्विक विरासत का एक बेहद खास हिस्सा मानी जाती है. राजा भोज काल की इस मां वाग्देवी प्रतिमा को वापस लाने की मांग काफी लंबे समय से उठती रही है. देश भर के तमाम सामाजिक, सांस्कृतिक और धार्मिक संगठन अलग-अलग मंचों से इस धरोहर को स्वदेश वापस स्थापित करने की आवाज उठाते रहे हैं.
केंद्र और राज्य का साझा प्रयास, ब्रिटेन से लगातार समन्वय
प्रतिमा की सकुशल वापसी सुनिश्चित करने के लिए केंद्र और मध्य प्रदेश सरकार एक साथ मिलकर काम कर रही हैं. अदालत के आदेश के अनुरूप विदेश मंत्रालय के जरिए आवश्यक कानूनी और कूटनीतिक कार्यवाही शुरू कर दी गई है. भारतीय प्रतिनिधिमंडल ब्रिटेन की संबंधित संस्थाओं और संग्रहालय अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए हुए हैं, ताकि सभी कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं जल्द पूरी हो सकें.
भोपाल में होने वाली BRICS बैठक में गूंज सकता है मुद्दा
राजधानी भोपाल में प्रस्तावित ब्रिक्स (BRICS) संस्कृति कार्य समूह और संस्कृति मंत्रियों की अंतरराष्ट्रीय बैठक में भी यह विषय प्रमुखता से उठ सकता है. माना जा रहा है कि इस वैश्विक मंच पर मां वाग्देवी की प्रतिमा की वापसी को एक प्रमुख स्थानीय सांस्कृतिक मुद्दे के तौर पर सामने रखा जाएगा. इस बैठक के दौरान दुनिया के विभिन्न देशों में मौजूद सांस्कृतिक कलाकृतियों की वापसी और उनके संरक्षण के वैश्विक नियमों पर भी गंभीर मंथन होने की संभावना है.
प्राचीन कलाकृतियों को वापस लाने का अभियान जारी
भारत सरकार पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी चोरी हुई या बाहर ले जाई गई प्राचीन कलाकृतियों, मूर्तियों और ऐतिहासिक पांडुलिपियों को वापस लाने के लिए आक्रामक अभियान चला रही है. धार की मां वाग्देवी प्रतिमा की स्वदेश वापसी को इसी राष्ट्रव्यापी अभियान का एक बेहद अहम और मील का पत्थर माना जा रहा है.