Congress MP Sukhdeo Bhagat: देशभर में सामने आए पेपर लीक मामलों को लेकर कांग्रेस सांसद सुखदेव भगत ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि यह सिर्फ परीक्षा में गड़बड़ी का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के भविष्य और विश्वास से जुड़ा सवाल है. ऐसे गंभीर मुद्दे पर सबसे पहले प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृहमंत्री और तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को सामने आकर जवाब देना चाहिए था.
सांसद ने कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद केंद्र सरकार ने अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई. उनका आरोप था कि जिन लोगों पर जवाबदेही बनती थी, उन्होंने अपनी नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय चुप्पी साधे रखी.
“धर्मेंद्र प्रधान के चेहरे पर पश्चाताप नहीं दिखा”
सुखदेव भगत ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों के बाद भी तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के व्यवहार में किसी तरह की ग्लानि या आत्ममंथन नजर नहीं आया. उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत हुआ मानो कोई बड़ी उपलब्धि हासिल हुई हो, जबकि हकीकत में देश के लाखों युवाओं के साथ अन्याय हुआ.
उन्होंने कहा, "मैं मानता हूं कि सबसे पहले प्रधानमंत्री, गृहमंत्री और धर्मेंद्र प्रधान से जवाब लिया जाना चाहिए था. लेकिन ऐसा नहीं हुआ."
“परीक्षा प्रणाली पर से उठ रहा युवाओं का भरोसा”
सांसद ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा वर्षों की मेहनत लगाते हैं, लेकिन बार-बार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों ने पूरी व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. उन्होंने कहा कि यदि समय रहते कठोर और पारदर्शी कदम नहीं उठाए गए तो युवाओं का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है.
उन्होंने केंद्र सरकार से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और सुरक्षित बनाने की मांग करते हुए कहा कि युवाओं के भविष्य के साथ किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जा सकता.
मोहन भागवत के प्रस्तावित संवाद पर भी उठाए सवाल
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के Generation Z के साथ प्रस्तावित संवाद को लेकर भी सुखदेव भगत ने अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि संवाद तभी सार्थक होगा, जब युवाओं की बात खुले मन से सुनी जाए. यदि केवल एकतरफा विचार रखे जाएंगे तो उसका उद्देश्य पूरा नहीं होगा.
उन्होंने कहा, "युवाओं की अभिव्यक्ति को स्वीकार करना जरूरी है. लेकिन मुझे नहीं लगता कि वहां वास्तविक संवाद होगा. मुझे लगता है कि वहां केवल प्रवचन दिया जाएगा."
भारत की विविधता का किया उल्लेख
सांसद ने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसकी साझी सांस्कृतिक विरासत और विविधता है. देश सदियों से अलग-अलग धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों को साथ लेकर आगे बढ़ता आया है. उन्होंने कहा कि किसी भी वैचारिक संवाद में इसी भावना का सम्मान होना चाहिए.