पिछले वित्तीय वर्ष की उपलब्धियां और चालू वर्ष का ब्योरा
समीक्षा बैठक के दौरान विभागीय अधिकारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विगत वर्षों के आय के आंकड़े प्रस्तुत किए. अधिकारियों ने बताया कि पिछले वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान विभाग को 2400 करोड़ रुपये का राजस्व हासिल करने का लक्ष्य सौंपा गया था, जिसके सापेक्ष कुल 2217 करोड़ रुपये की वसूली दर्ज की गई थी. यह आंकड़ा कुल निर्धारित लक्ष्य का लगभग 92 प्रतिशत था. वहीं, वर्तमान वित्तीय वर्ष 2026-27 की प्रगति साझा करते हुए जानकारी दी गई कि मई महीने तक विभाग के खाते में 389 करोड़ रुपये का राजस्व जमा हो चुका है.
अंतरराज्यीय तुलना में कम वसूली पर चिंता, चेकिंग अभियान में तेजी लाने का दिया आदेश
बैठक में पड़ोसी राज्यों की तुलनात्मक रिपोर्ट भी रखी गई, जिससे यह बात सामने आई कि उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र की तुलना में झारखंड में वाहनों की सघन जांच के जरिए प्राप्त होने वाला जुर्माना व राजस्व काफी कम है. इस स्थिति पर गहरी चिंता प्रकट करते हुए मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि राज्यभर की सड़कों पर गाड़ियों की नियमित और औचक जांच का विशेष अभियान संचालित किया जाए. उन्होंने कहा कि यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों और अवैध रूप से संचालित वाहनों पर बिना किसी रियायत के कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए.
किन-किन स्रोतों से जुटाया जाता है परिवहन राजस्व?
उल्लेखनीय है कि परिवहन विभाग की कमाई का मुख्य जरिया वाहनों का रोड टैक्स, नया पंजीकरण शुल्क, परमिट जारी करना, ड्राइविंग लाइसेंस फीस और वाहन फिटनेस प्रमाण पत्र जारी करना है. इसके अतिरिक्त, क्षमता से अधिक माल लादकर चलने वाले ओवरलोडेड वाहनों, बिना वैध परमिट के दौड़ रही गाड़ियों, टैक्स की चोरी करने वाले वाहन स्वामियों तथा बिना बीमा या फिटनेस प्रमाणपत्र के सड़कों पर चलने वाली गाड़ियों पर लगाया जाने वाला जुर्माना भी विभाग के कुल राजस्व में बड़ा योगदान देता है. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को पूरी प्रणाली की पारदर्शी तरीके से निरंतर मॉनिटरिंग करने और इस साल 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए प्रतिबद्धता के साथ काम करने को कहा है.